नए नोट में लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को शामिल करने पर विवाद, भारत ने कहा– संप्रभुता से समझौता नहीं
भारत के पड़ोसी देश नेपाल ने गुरुवार को 100 रुपये के नए नोट जारी कर दिए हैं,
जिनमें देश का संशोधित नक्शा शामिल किया गया है।
इस नक्शे में लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी जैसे
भारतीय क्षेत्रों को नेपाल के हिस्से के रूप में दिखाया गया है, जिस पर भारत ने सख्त आपत्ति जताई है।
नेपाल के सेंट्रल बैंक नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) के मुताबिक,
ये नए नोट शुक्रवार से आधिकारिक रूप से चलन में आ गए हैं।
NRB का दावा: सिक्योरिटी फीचर्स और पहचान के लिए नया डिजाइन
नेपाल राष्ट्र बैंक ने एक सार्वजनिक नोटिस में कहा कि नए नोट का डिज़ाइन
बेहतर सुरक्षा फीचर्स और पहचान के तत्वों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
नए नोट की प्रमुख विशेषताएं:
- बाईं ओर: माउंट एवरेस्ट
- दाईं ओर: राष्ट्रीय फूल रोडोडेंड्रोन का वॉटरमार्क
- बीच में: नेपाल के नक्शे और अशोक स्तंभ की तस्वीर
- मुख्य चित्र: एक सींग वाला गैंडा और उसका बच्चा
- दिव्यांगों के लिए: टैक्टाइल काला डॉट
- पिछला हिस्सा: ओवल में माया देवी की सिल्वर मेटैलिक इमेज
- हस्ताक्षर: तत्कालीन गवर्नर महा प्रसाद अधिकारी
- सीरीज़: नेपाली अंकों में ‘2081’
चीनी कंपनी को मिला छपाई का ठेका
पिछले साल अक्टूबर में NRB ने नए नोटों की छपाई का कॉन्ट्रैक्ट
चाइना बैंकनोट प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन को दिया था।
नेपाल की तत्कालीन केपी शर्मा ओली सरकार ने मई 2024 में इन नोटों की डिज़ाइन को अंतिम मंजूरी दी थी।
कुल मिलाकर 300 मिलियन (30 करोड़) नोट डिजाइन, प्रिंट और सप्लाई किए जाने का ऑर्डर दिया गया।
भारत का स्पष्ट रुख: “ऐतिहासिक तथ्यों के खिलाफ”
भारत इससे पहले भी नेपाल के इस दावे को खारिज करता रहा है।
20 मई 2020 को नेपाल ने संवैधानिक संशोधन के जरिए इन क्षेत्रों को अपने नक्शे में शामिल किया था,
जिसे भारत ने एकतरफा और तथ्यहीन बताते हुए अस्वीकार कर दिया था।
विदेश मंत्रालय ने कहा था नेपाल सरकार का यह कदम ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित नहीं है।
यह दोनों देशों के बीच विवाद सुलझाने की भावना के खिलाफ है।
भारत ने फिर दोहराया
सरकार ने हाल ही में फिर स्पष्ट किया कि:
- नेपाल भारत के रुख से भली-भांति वाकिफ है
- ऐसे नक्शों के जरिए दावे मान्य नहीं होंगे
- भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता नहीं किया जा सकता
अगस्त में भी नेपाल की उस आपत्ति को खारिज कर दिया था,
जिसमें लिपुलेख दर्रे के जरिए भारत-चीन व्यापार को दोबारा शुरू करने पर नेपाल ने सवाल उठाया था।
लिपुलेख व्यापार मार्ग: 1954 से जारी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि:
- भारत–चीन सीमा व्यापार 1954 से लिपुलेख मार्ग के जरिए हो रहा है
- कोविड काल में अस्थायी रूप से बंद हुआ
- हाल ही में दोबारा शुरू करने पर सहमति बनी
- नेपाल के क्षेत्रीय दावे न ऐतिहासिक रूप से सही हैं, न कानूनी रूप से
















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