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सरोकारों से साक्षात्कार

25 साल बाद भी विकास से दूर घिमतोली

तीर्थाटन–पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद शासन–प्रशासन की अनदेखी

विकासखंड की मांग फिर तेज

पट्टी तल्लानागपुर का सीमांत क्षेत्र घिमतोली राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी

विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है।

प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह क्षेत्र तीर्थाटन और पर्यटन की अपार संभावनाएं समेटे हुए है,

लेकिन सरकारी उपेक्षा के चलते आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।

80 के दशक से विकासखंड की मांग, मिले सिर्फ आश्वासन

स्थानीय जनता द्वारा घिमतोली क्षेत्र में विकासखंड मुख्यालय खोलने की मांग 1980 के दशक से लगातार की जा रही है,

लेकिन शासन–प्रशासन स्तर पर ग्रामीणों को अब तक केवल कोरे आश्वासन ही मिले हैं।

चुनाव के समय वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में फाइलें ठंडे बस्ते में चली जाती हैं।

1952 का डाक बंगला बना आवारा पशुओं का ठिकाना

घिमतोली क्षेत्र में वर्ष 1952 में निर्मित जिला पंचायत का डाक बंगला आज बदहाली का शिकार है।

रखरखाव के नाम पर समय–समय पर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद देखरेख के अभाव में यह भवन आवारा पशुओं का आशियाना बनता जा रहा है।

पर्यटन विकास से बदल सकती है तस्वीर

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि पर्यटन विभाग की पहल पर प्रदेश सरकार

  • कोटखाल–कार्तिक स्वामी,
  • घिमतोली–नैणी देवी,
  • गौचर–जागतोली–घिमतोली–गणेशनगर

जैसे दशकों पुराने पैदल ट्रेक मार्गों को विकसित करे और 1952 के डाक बंगले को

पर्यटक आवास गृह के रूप में विकसित किया जाए,

तो घिमतोली को पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान मिल सकती है।

इससे सीमांत क्षेत्र में होम-स्टे योजना को भी बढ़ावा मिलेगा।

कभी प्रशासनिक केंद्र रहा घिमतोली

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2005 तक घिमतोली क्षेत्र दशज्यूला और तल्ला कालीफाट

के दर्जनों गांवों का केंद्र बिंदु हुआ करता था।

उस समय यहां वन विभाग, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्यान और पशुपालन विभाग

सहित कई सरकारी कार्यालय सक्रिय थे, जिन्होंने क्षेत्र के सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभाई।

लेकिन 2005 के बाद विभिन्न मोटर मार्गों और नए शैक्षणिक केंद्रों के खुलने से

घिमतोली धीरे–धीरे विकास से कटता चला गया और कभी गुलजार रहने वाली घाटियां आज वीरान नजर आती हैं।

25 साल बाद भी विकास से दूर घिमतोली

स्थानीय लोगों की पीड़ा

स्थानीय व्यापारी उमेद सिंह नेगी का कहना है कि प्रकृति ने घिमतोली को नव नवेली दुल्हन की तरह सजाया है,

लेकिन शासन–प्रशासन की अनदेखी ने इसे विकास का मोहताज बना दिया है।

वहीं व्यापारी मनवर सिंह का कहना है कि यदि कोटखाल–कार्तिक स्वामी

और घिमतोली–नैणी देवी पैदल ट्रेक विकसित किए जाएं तो क्षेत्र में तीर्थाटन–पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिल सकती है।

आंदोलन की चेतावनी

पूर्व प्रधान रघुवीर नेगी ने स्पष्ट किया कि विकासखंड स्थापना के लिए आंदोलन किया जाएगा,

क्योंकि अब तक प्रदेश सरकारों ने क्षेत्रीय जनता के साथ छल किया है।

पूर्व प्रधान बसंती देवी ने कहा कि शीघ्र ही प्रदेश सरकार से घिमतोली क्षेत्र में तीर्थाटन–पर्यटन को बढ़ावा देने की ठोस मांग रखी जाएगी।

सरकार की पहल और उम्मीद

भाजपा चोपता मंडल अध्यक्ष अर्जुन नेगी ने बताया कि आशा नौटियाल की पहल पर पुष्कर सिंह धामी

द्वारा स्वारी–ग्वास–कार्तिक स्वामी मोटर मार्ग की घोषणा की जा चुकी है।

उनका कहना है कि इस मोटर मार्ग के निर्माण के बाद घिमतोली क्षेत्र में तीर्थाटन–पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलना स्वाभाविक है।

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लक्ष्मण सिंह नेगी
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