सरस्वती देवी की पदयात्रा ने राष्ट्रीय पटल पर छोड़ी अमिट छाप
25 फरवरी से श्रीनगर से शुरू हुआ संघर्ष 8 मार्च को दिल्ली पहुंचा
LUCC घोटाले से पीड़ित महिलाओं की आवाज आखिरकार देश की राजधानी तक पहुंच गई।
सामाजिक कार्यकर्ता सरस्वती देवी के नेतृत्व में 25 फरवरी 2026 को श्रीनगर गढ़वाल से शुरू हुई
पदयात्रा 8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन दिल्ली पहुंची और राष्ट्रपति भवन तक न्याय की मांग गूंज उठी।
इस आंदोलन की सबसे बड़ी बात यह रही कि सरस्वती देवी का खुद का पैसा इस घोटाले में फंसा नहीं था,
इसके बावजूद उन्होंने हजारों पीड़ित महिलाओं के हक के लिए संघर्ष का रास्ता चुना।
उनके इस कदम ने न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि राष्ट्रीय पटल पर भी एक अमिट छाप छोड़ दी।
पैसा नहीं था, इसलिए चुनी पदयात्रा की राह
सरस्वती देवी ने बताया कि LUCC घोटाले में गरीब परिवारों और महिलाओं की करोड़ों की जमा पूंजी फंस गई है।
ऐसे में उन्होंने पदयात्रा का रास्ता इसलिए चुना क्योंकि यात्रा में किसी प्रकार का खर्च नहीं होना था।
उन्होंने कहा कि यह वही पैसा है जिसके लिए महिलाएं संघर्ष कर रही हैं, इसलिए आंदोलन भी उसी दर्द से निकला।
10 महिलाओं से शुरू हुई यात्रा, रास्ते में आईं कई मुश्किलें
25 फरवरी को श्रीनगर गढ़वाल से 10 महिलाओं का जत्था दिल्ली की ओर कूच कर गया। यात्रा आसान नहीं थी।
कई महिलाओं के पैर सूज गए, कुछ की तबीयत खराब हो गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती भी कराना पड़ा।
लेकिन तमाम कठिनाइयों के बावजूद महिलाओं ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार आगे बढ़ती रहीं।
यात्रा के दौरान सरस्वती देवी ने रास्ते में कई समस्याओं को भी उजागर किया।
उन्होंने बताया कि कई जगह माइलस्टोन पर गलत दूरी लिखी हुई थी, जबकि राष्ट्रीय राजमार्गों पर जगह-जगह गंदगी फैली हुई मिली।
300 लोगों का जत्था पहुंचा राष्ट्रपति भवन की ओर
8 मार्च 2026 को दिल्ली के गढ़वाल भवन से करीब 300 लोगों का एक बड़ा जत्था
राष्ट्रपति भवन की ओर कूच करने के लिए तैयार हुआ।
लेकिन जब यह समूह बिरला मंदिर के पास पहुंचा,
जो राष्ट्रपति भवन से करीब 2 किलोमीटर पहले है, तो सुरक्षा कारणों से उन्हें वहीं रोक दिया गया।
काफी देर तक बातचीत और पूछताछ के बाद प्रतिनिधिमंडल को सचिवालय ले जाया गया,
जहां अधिकारियों के साथ चर्चा और परामर्श हुआ।
दो दिन में राष्ट्रपति से मुलाकात का आश्वासन
बैठक के बाद अधिकारियों की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि दो दिन के भीतर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू LUCC पीड़ित महिलाओं से मुलाकात करेंगी और उनकी बात सुनेंगी।
इस आश्वासन के बाद महिलाओं में उम्मीद की नई किरण जगी है।
“यह पूरे प्रदेश की महिलाओं की जीत”
सरस्वती देवी ने कहा कि यह सिर्फ उनकी नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की महिलाओं की जीत है।
उन्होंने कहा कि यह संघर्ष उन महिलाओं की जीत है जो घर में बैठने के बजाय अपने
अधिकारों के लिए सड़क पर उतरती हैं और अपनी आवाज बुलंद करती हैं।
गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी से भी हुई बातचीत
यात्रा के दौरान गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने भी महिलाओं को बातचीत के लिए बुलाया।
सरस्वती देवी ने 8 मार्च को अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि 6 मार्च को उनका एक
प्रतिनिधिमंडल सांसद अनिल बलूनी से मिलने गया था।
पोस्ट के अनुसार सांसद ने कहा कि कैबिनेट मंत्री धनसिंह रावत की नीतियों से उत्तराखंड को नुकसान हुआ है,
और LUCC घोटाला भी उसी का परिणाम है।
अब न्याय की उम्मीद
LUCC घोटाले से पीड़ित महिलाओं को अब उम्मीद है कि राष्ट्रपति से प्रस्तावित
मुलाकात के बाद इस मामले की जांच और पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया तेज होगी।
सरस्वती देवी की यह पदयात्रा अब संघर्ष और हौसले की मिसाल बन चुकी है,
जिसने दिखा दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो आवाज गांव से निकलकर देश की राजधानी तक पहुंच सकती है।
















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