राष्ट्रपति भवन में होगा सम्मान
उत्तराखंड के वरिष्ठ राजनेता, पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल Bhagat Singh Koshyari
को आज देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में राष्ट्रपति Droupadi Murmu उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगी।
लंबे सार्वजनिक जीवन की मान्यता
यह सम्मान उनके लंबे राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षिक योगदान की मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।
इसे उत्तराखंड के लिए भी गर्व का क्षण माना जा रहा है।
राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में उनके योगदान को देखते हुए
उन्हें यह राष्ट्रीय सम्मान दिए जाने की मांग लंबे समय से उठती रही थी।
साधारण गांव से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर
17 जून 1942 को बागेश्वर जिले के पलानधुरा गांव में जन्मे भगत सिंह कोश्यारी ने साधारण ग्रामीण परिवेश
से अपनी शिक्षा और मेहनत के दम पर राष्ट्रीय राजनीति में पहचान बनाई।
उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक डिग्री प्राप्त की और शिक्षा क्षेत्र में भी कार्य किया।
शिक्षा और सामाजिक कार्यों में योगदान
उन्होंने कासगंज के सरस्वती शिशु मंदिर में अध्यापन कार्य किया और बाद में सीमांत क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार के लिए कार्य किया।
वर्ष 1966 में पिथौरागढ़ में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना कर दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा की शुरुआत को गति दी।
राजनीतिक सफर
- 1997: उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए नामित
- उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका
- 2000: उत्तराखंड के पहले मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री
- बाद में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य
- 2008: राज्यसभा सांसद
- 2014: नैनीताल-ऊधमसिंह नगर से लोकसभा सांसद
राज्यपाल के रूप में जिम्मेदारियां
2019 में उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। बाद में गोवा का अतिरिक्त प्रभार भी उन्हें सौंपा गया।
अपने कार्यकाल में उन्होंने कई संवैधानिक जिम्मेदारियां निभाईं।
उत्तराखंड में खुशी की लहर
पद्म भूषण सम्मान की घोषणा के बाद उत्तराखंड में खुशी का माहौल है।
राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने इसे राज्य के लिए गौरव का क्षण बताया है।
सोशल मीडिया पर भी उन्हें लगातार बधाइयां मिल रही हैं।
















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