वेद मंत्रों, भजनों और जयकारों के बीच शुरू हुई दिव्य यात्रा
पर्वतराज हिमालय की गोद में बसे द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख केदारनाथ धाम के लिए
भगवान केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर से कैलाश की ओर रवाना हो गई।
डोली के प्रस्थान के दौरान पूरा क्षेत्र भक्ति और उत्साह से सराबोर नजर आया।
वेद ऋचाओं, भक्तों की जयकारों, महिलाओं के भजनों और आर्मी बैंड की मधुर धुनों ने वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना दिया।
8 कुंतल फूलों से सजा मंदिर, भंडारों का आयोजन
डोली प्रस्थान से पूर्व ओंकारेश्वर मंदिर को लगभग 8 कुंतल विभिन्न प्रजातियों के फूलों से भव्य रूप से सजाया गया।
- श्रद्धालुओं द्वारा विशाल भंडारों का आयोजन
- देश-विदेश से पहुंचे भक्तों की भारी भीड़
- मंदिर परिसर में आस्था का अद्भुत दृश्य

वैदिक मंत्रोच्चारण और विशेष पूजन के साथ हुआ शुभारंभ
रविवार ब्रह्म मुहूर्त में विद्वान आचार्यों द्वारा पंचांग पूजन और विशेष अनुष्ठान किए गए।
- 33 कोटि देवी-देवताओं का आवाहन
- विश्व शांति और समृद्धि की कामना
- केदारनाथ यात्रा 2026 के निर्विघ्न संचालन हेतु प्रार्थना
रावल भीमाशंकर लिंग ने केदारनाथ धाम के प्रधान पुजारी टी गंगाधर लिंग को
परंपरागत पगड़ी और अचकन पहनाकर छह माह के प्रवास और पूजा का संकल्प दिलाया।
कैलाश यात्रा का शुभ प्रस्थान, श्रद्धालुओं में उत्साह
सुबह 9:30 बजे डोली ने ओंकारेश्वर मंदिर की परिक्रमा कर कैलाश के लिए प्रस्थान किया।
- श्रद्धालुओं की गूंजती जयकारें
- आर्मी बैंड की धुनों पर झूमते भक्त
- पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार
यात्रा कार्यक्रम (शेड्यूल)
- 20 अप्रैल: फाटा में प्रथम रात्रि प्रवास
- 20 अप्रैल (द्वितीय पड़ाव): गौरीकुंड
- 21 अप्रैल: केदारनाथ धाम पहुंचकर भंडार गृह में विराजमान
- 22 अप्रैल सुबह 8 बजे: केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे















Leave a Reply