IMD के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता, ‘सुपर अल नीनो’ के असर से कमजोर पड़ सकता है मानसून
भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून आमतौर पर 10 जून तक मुंबई और कोंकण क्षेत्र में पहुंच जाता है।
लेकिन वर्ष 2026 में मानसून की रफ्तार धीमी बनी हुई है
और सामान्य समय सीमा बीत जाने के बावजूद बादल अभी तक मुंबई नहीं पहुंचे हैं।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर उत्तर भारत में मानसून की प्रगति पर भी पड़ सकता है।
कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की कमी दर्ज की गई है।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 43 प्रतिशत, मध्य भारत में 63 प्रतिशत
और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है।
‘सुपर अल नीनो’ बना चिंता का कारण
मौसम वैज्ञानिकों ने 2026 को संभावित ‘सुपर अल नीनो’ वर्ष बताया है।
अल नीनो की स्थिति में प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिससे भारतीय मानसून कमजोर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जून में बारिश की कमी भविष्य के मानसून सीजन के लिए चिंता बढ़ाने वाली है।
2009 और 2014 जैसे हालात की आशंका
मौसम के आंकड़े बताते हैं कि 2009 और 2014 में भी जून महीने में भारी बारिश की कमी देखी गई थी।
2009 में जून के दौरान सामान्य से 47 प्रतिशत और 2014 में 44 प्रतिशत कम वर्षा हुई थी।
इस वर्ष भी शुरुआती संकेत उन्हीं वर्षों जैसे दिखाई दे रहे हैं।
समुद्र का बढ़ता तापमान भी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार समुद्र की सतह का बढ़ता तापमान और अल नीनो की सक्रियता मानसून की गति को प्रभावित कर रही है।
इसके अलावा पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) और मानसूनी हवाओं के बीच चल रही
मौसमी खींचतान भी मानसून की प्रगति को धीमा कर रही है।
आगे कैसा रहेगा मानसून?
मौसम विभाग की नजर अब आने वाले हफ्तों पर टिकी है।
यदि मानसून जल्द सक्रिय नहीं हुआ तो कई राज्यों में खेती, जलाशयों और पेयजल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि पूरे सीजन का आकलन केवल जून के आधार पर नहीं किया जा सकता
और जुलाई की बारिश निर्णायक साबित होगी।















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