बिना अनुमति तीन टन का शिवलिंग लेकर पहुंची संस्था, आदिवासी समुदाय के विरोध के बाद प्रशासन ने रोका
व्यास घाटी में शिवलिंग स्थापना को लेकर शुरू हुआ विवाद
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में स्थित ओम पर्वत के सामने शिवलिंग और नंदी की स्थापना को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
एक धार्मिक संस्था द्वारा तीन टन वजनी शिवलिंग और नंदी स्थापित करने की कोशिश का स्थानीय रं समुदाय ने विरोध किया है।
रं समुदाय ने परंपराओं का हवाला देकर जताई आपत्ति
रं समुदाय का कहना है कि वे सदियों से प्रकृति पूजा की परंपरा का पालन करते आए हैं।
उनकी मान्यता के अनुसार भगवान शिव की पूजा प्राकृतिक स्वरूप में की जाती है और उनकी भूमि पर किसी कृत्रिम धार्मिक ढांचे की स्थापना स्वीकार नहीं की जा सकती।
बिना अनुमति पहुंची थी धार्मिक संस्था
रिपोर्ट के अनुसार सनातन धर्म के प्रचार का दावा करने वाला ‘आदि कैलाश 2020 ट्रस्ट’ स्थानीय ग्राम सभा
और आदिवासी संगठनों की अनुमति लिए बिना शिवलिंग और नंदी को लेकर गर्बाधार क्षेत्र तक पहुंच गया था।
मामले की जानकारी मिलने पर रं कल्याण संस्था ने इसका विरोध किया।
प्रशासन ने हस्तक्षेप कर रोकी प्रक्रिया
विरोध के बाद स्थानीय प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए मूर्तियां लेकर जा रहे वाहन को वापस धारचूला बुला लिया।
प्रशासन का कहना है कि स्थानीय ग्राम सभा और संबंधित समुदाय की सहमति के बिना किसी भी प्रकार की स्थापना की अनुमति नहीं दी जा सकती।
सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा का सवाल
रं कल्याण संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष व्यास घाटी में पारंपरिक ‘जुमली ह्या सामो’ उत्सव का आयोजन होना है।
ऐसे में समुदाय अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के विपरीत किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं करेगा।
ट्रस्ट ने कहा- अनुमति मिलने का इंतजार
‘आदि कैलाश 2020 ट्रस्ट’ से जुड़े लोगों का कहना है कि वे सनातन धर्म के प्रचार के उद्देश्य से शिवलिंग लेकर आए थे
और अनुमति के लिए बातचीत चल रही है। हालांकि स्थानीय विरोध के चलते फिलहाल स्थापना की प्रक्रिया रोक दी गई है।















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