उत्तराखंड जल संस्थान ने जारी किया आदेश, कर्मचारी संगठनों ने फैसले का किया विरोध
उत्तराखंड जल संस्थान में कार्यरत उपनल (UPNL) कर्मियों के लिए ‘समान काम, समान वेतन’ का लाभ लेने की प्रक्रिया में नई शर्त जोड़ दी गई है।
जल संस्थान प्रबंधन ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि संबंधित कर्मचारियों को एक महीने के भीतर विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।
परीक्षा में सफल होने के बाद ही समान वेतन का लाभ जारी रहेगा।
शासन के निर्देशों के बाद जारी हुआ आदेश
जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डोक सिंह की ओर से जारी आदेश के अनुसार, शासन के निर्देशों के तहत समान वेतन दिया जा रहा है,
लेकिन निर्धारित नियमों के अनुसार कर्मचारियों को अपने पद से संबंधित विभागीय परीक्षा भी देनी होगी।
परीक्षा में सफल होने के बाद ही उन्हें इस व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
विभिन्न पदों के लिए अलग-अलग होगी परीक्षा
जल संस्थान में उपनल के माध्यम से डेटा एंट्री ऑपरेटर, स्टेनोग्राफर, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सहित करीब 150 कर्मचारी कार्यरत हैं।
आदेश के अनुसार सभी कर्मचारियों को अपने पद के अनुरूप परीक्षा देनी होगी।
- डेटा एंट्री ऑपरेटर को कंप्यूटर टाइपिंग परीक्षा देनी होगी।
- स्टेनोग्राफर को शॉर्टहैंड परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।
- अन्य पदों के लिए भी संबंधित कार्य के अनुसार मूल्यांकन किया जाएगा।
कर्मचारियों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक महीने का समय दिया गया है।
कर्मचारी संगठनों ने जताई नाराजगी
आदेश के बाद कर्मचारी संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।
कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के संयोजक नंदलाल जोशी ने कहा कि कार्मिक विभाग के आदेश में विभागीय परीक्षा का कोई उल्लेख नहीं है।
उनका कहना है कि 15 से 20 वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे कर्मचारियों से अब परीक्षा लेना मानसिक उत्पीड़न के समान है और इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
चमोली और रुद्रप्रयाग में भी विरोध
संयुक्त मोर्चा जल संस्थान चमोली-रुद्रप्रयाग के अध्यक्ष गिरीश नेगी और राज्य आंदोलनकारी सुरेंद्र प्रसाद सकलानी ने भी इस फैसले का विरोध किया है।
उनका कहना है कि वर्षों से नियमित रूप से सेवाएं दे रहे उपनल कर्मचारियों के लिए अब विभागीय परीक्षा अनिवार्य करना उचित नहीं है।
हजारों कर्मचारियों पर पड़ सकता है असर
जानकारी के अनुसार, जल संस्थान में बड़ी संख्या में उपनल कर्मी कार्यरत हैं और समान वेतन के दायरे में आने वाले कर्मचारियों पर इस निर्णय का प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि, विभिन्न स्रोतों में कर्मचारियों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं।
विभाग की ओर से आधिकारिक और विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक होने की प्रतीक्षा है।
विवाद बढ़ने के आसार
जल संस्थान के आदेश के बाद कर्मचारी संगठनों और प्रबंधन के बीच विवाद गहराने की संभावना है।
कर्मचारी संगठन आदेश वापस लेने की मांग कर रहे हैं, जबकि विभाग का कहना है कि यह निर्णय शासन के निर्देशों और निर्धारित नियमों के अनुरूप लिया गया है।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच वार्ता होने की संभावना है।















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