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भारतीय मूल्यों से वैश्विक संकटों का समाधान संभव: प्रो. विमला

भारतीय ज्ञान परंपरा को लेकर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय की

कुलपति प्रो. विमला वाई ने कहा कि भारतीय चिंतन और मूल्य मौजूदा वैश्विक संकटों से निपटने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय, सहारनपुर और चमन लाल स्वायत्त महाविद्यालय, हरिद्वार के संयुक्त तत्वावधान में यह संगोष्ठी आयोजित की गई।

इसका विषय ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन वैश्विक संकट: नैतिक मूल्यों के आधार पर समाधान की संभावनाएं’ रखा गया था।

भारतीय ज्ञान परंपरा को वर्तमान से जोड़ने पर जोर

मुख्य अतिथि प्रो. विमला वाई ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की विरासत नहीं है।

इसमें वर्तमान और भविष्य के लिए भी एक समग्र जीवन-दृष्टि मौजूद है।

उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुंबकम्’, ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’, लोकमंगल, सह-अस्तित्व और कर्तव्य-बोध

जैसे मूल्य वैश्विक संकटों के बीच मानवता को संतुलित दिशा दे सकते हैं।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो. बृजेन्द्र पांडेय ने कहा कि भारतीय ज्ञान दृष्टि मनुष्य को प्रकृति, समाज और पूरी सृष्टि से जोड़कर देखने की सोच देती है।

उन्होंने सत्य, अहिंसा, करुणा और सह-अस्तित्व जैसे मूल्यों को मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

शिक्षा और नीति निर्माण से जोड़ने की जरूरत

समापन सत्र में मोतिहारी केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक प्रासंगिकता पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि भारतीय चिंतन में ज्ञान और आचरण का गहरा संबंध है। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’, लोकसंग्रह और

सर्वजन हिताय की भावना आज के विभाजित विश्व को मानवीय दृष्टि दे सकती है।

उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के नैतिक मूल्यों को आधुनिक शिक्षा, नीति निर्माण और सामाजिक जीवन से जोड़ने पर जोर दिया।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. कमल कृष्ण ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के मानवीय और नैतिक मूल्यों को शिक्षा एवं शोध से जोड़ना समय की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि दोनों संस्थानों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के जरिए संयुक्त शोध, संगोष्ठियों और ज्ञान-विनिमय जैसी अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

युद्ध और पर्यावरण संकट पर भी चर्चा

चमन लाल महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुशील उपाध्याय ने कहा कि दुनिया इस समय कई तरह के संकटों से गुजर रही है। युद्धों ने भी मानवता के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी की हैं।

उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में भारतीय नैतिक और मानवीय मूल्यों को आधुनिक संदर्भ में समझना जरूरी है।

विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. राजीव कुमार ने कहा कि भारतीय परंपरा में ज्ञान को जीवन और आचरण से जोड़कर देखा गया है।

शिक्षा का उद्देश्य केवल बौद्धिक विकास नहीं, बल्कि नैतिक चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करना भी होना चाहिए।

शोध पत्रों में समकालीन चुनौतियों पर विमर्श

अकादमिक समन्वयक प्रो. विनोद कुमार ने कहा कि संगोष्ठी में भारतीय ज्ञान परंपरा के नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर शोध आधारित चर्चा हुई।

संगोष्ठी के संयोजक डॉ. विजय प्रताप सिंह ने कहा कि युद्ध, पर्यावरण संकट, सामाजिक असमानता

और नैतिक संकट जैसी चुनौतियों के बीच भारतीय परंपरा के समन्वय, संयम और लोककल्याण के सिद्धांत प्रासंगिक हैं।

आयोजन सचिव डॉ. नीशू कुमार के अनुसार, देश के कई राज्यों से शिक्षक, शोधार्थी और अन्य प्रतिभागी संगोष्ठी में शामिल हुए। विभिन्न तकनीकी सत्रों में शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. नीशू कुमार और डॉ. विजय प्रताप सिंह द्वारा संपादित पुस्तक का विमोचन भी किया गया।

https://youtu.be/1kYfFDB_4rQ?si=0RyuU-6hqTFfLcuT
https://regionalreporter.in/duggal-bitta-inspection-house-lease-congress-protest/

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