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रक्तदान बना सेवा का संकल्प: किसी ने 2 तो किसी ने 52वीं बार किया रक्तदान

ईद मिलादुन्नबी और रक्षाबंधन के अवसर पर श्रीनगर गढ़वाल में तीसरे रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।

शिविर में युवाओं समेत विभिन्न वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आयोजकों ने इस बार 120 से 130 यूनिट रक्त संग्रह का लक्ष्य रखा था।

शिविर में बेस अस्पताल की टीम ने रक्तदान की प्रक्रिया पूरी कराई।

बेस अस्पताल के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सतीश कुमार ने बताया कि शिविर में कुल 105 यूनिट रक्त संग्रह किया गया।

पर्याप्त रक्त संग्रह होने के कारण करीब 20 लोगों को बिना रक्तदान किए वापस लौटना पड़ा।

दो शिविरों में 190 यूनिट रक्तदान

आयोजक मेहबा ने बताया कि इससे पहले वर्ष 2024 में आयोजित रक्तदान शिविर में 102 यूनिट रक्त एकत्र हुआ था।

वर्ष 2025 में 88 यूनिट रक्तदान किया गया था।

दोनों शिविरों में कुल करीब 190 यूनिट रक्त एकत्र हुआ था।

इस बार भी बड़ी संख्या में लोग रक्तदान के लिए पहुंचे।

शिविर के शुरुआती दौर में ही करीब 50 यूनिट रक्त एकत्र हो गया था। इसके बाद भी रक्तदान के लिए लोगों की कतार लगी रही।

त्योहारों पर मानवता और भाईचारे का संदेश

आयोजकों ने कहा कि ईद मिलादुन्नबी और रक्षाबंधन जैसे पर्व मानवता, भाईचारे और सेवा का संदेश देते हैं।

ऐसे में जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्तदान करना इन पर्वों को मनाने का बेहतर तरीका है।

उन्होंने कहा कि रक्त का कोई धर्म या जाति नहीं होती।

अस्पताल में मरीज को रक्त की जरूरत होने पर रक्तदाता का धर्म या समुदाय नहीं देखा जाता।

इसलिए त्योहारों के अवसर पर रक्तदान सामाजिक सौहार्द का मजबूत संदेश देता है।

रक्तदाताओं ने बताया अपना अनुभव

दूसरी बार रक्तदान कर रहे मोहम्मद वसीम

मोहम्मद वसीम ने बताया कि वह पिछले 8 से 10 वर्षों से श्रीनगर में रह रहे हैं। वह पेंट का काम करते हैं और दूसरी बार रक्तदान कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पहली बार रक्तदान को लेकर मन में थोड़ी झिझक थी। अब रक्तदान करने के बाद उन्हें अच्छा महसूस होता है। उन्होंने लोगों से रक्तदान से नहीं डरने की अपील की।

वसीम ने कहा कि रक्त की एक यूनिट किसी जरूरतमंद मरीज की जान बचाने में मदद कर सकती है।

मोहम्मद अकील ने 10 बार किया रक्तदान

मोहम्मद अकील अब तक 10 बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि जब पता चलता है कि उनके रक्त से किसी की जान बच सकती है तो उन्हें खुशी और गर्व महसूस होता है।

उन्होंने कहा कि जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करने की यह भावना शब्दों में बयान करना मुश्किल है।

इस्लाम अहमद बोले- इंसानियत की आज जरूरत है

इस्लाम अहमद ने बताया कि वह दूसरी बार रक्तदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति को रक्तदान करते देखकर दूसरे लोग भी प्रेरित होते हैं।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में इंसानियत की जरूरत है। अगर रक्तदान के जरिए किसी की जान बचाने में सहयोग मिल सके तो इससे बड़ी बात नहीं हो सकती।

विकास शर्मा ने 52वीं बार किया रक्तदान

शिविर में हरियाणा के रहने वाले विकास शर्मा का अनुभव सबसे खास रहा। वह श्रीनगर में एनएच में नौकरी करते हैं।

उन्होंने बताया कि वह वर्ष 1994 से रक्तदान कर रहे हैं और अब तक 52 बार रक्तदान कर चुके हैं।

विकास शर्मा ने बताया कि उन्होंने पहली बार 20 साल की उम्र में रक्तदान किया था। उनके एक मित्र के पिता को ब्लड कैंसर हुआ था। उसी समय उन्होंने पहली बार रक्तदान किया।

इसके बाद रक्तदान उनके लिए जिम्मेदारी के साथ सेवा का माध्यम बन गया।

उन्होंने कहा कि अगर उनकी एक यूनिट रक्त से किसी की जिंदगी बच सकती है तो इससे बड़ा सहयोग और क्या हो सकता है।

डॉक्टर ने बताया कौन कर सकता है रक्तदान

रक्तदान शिविर की निगरानी कर रहे बेस अस्पताल के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सतीश कुमार ने रक्तदान से जुड़े मानकों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर पहली बार रक्तदान करने वाले व्यक्ति की उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

नियमित रक्तदाता के लिए अधिक उम्र में भी रक्तदान की अनुमति हो सकती है।

उन्होंने बताया कि रक्तदाता का हीमोग्लोबिन कम से कम 12.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर

और वजन कम से कम 45 किलोग्राम होना जरूरी है। अंतिम उपयुक्तता स्वास्थ्य जांच के बाद तय की जाती है।

महिलाओं में एनीमिया को लेकर जताई चिंता

डॉ. सतीश कुमार ने महिलाओं में एनीमिया को लेकर भी चिंता जताई।

उन्होंने बताया कि कई महिलाएं रक्तदान के लिए शिविर में पहुंचती हैं।

हालांकि, हीमोग्लोबिन मानक से कम होने के कारण कई महिलाओं को रक्तदान के लिए अनफिट करना पड़ता है।

उन्होंने खान-पान पर ध्यान देने और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की बात कही।

रक्तदान को लेकर झिझक दूर करना जरूरी

डॉ. सतीश कुमार ने कहा कि पहली बार रक्तदान करने वालों में डर और झिझक होना सामान्य है।

जागरूकता बढ़ाकर इस झिझक को दूर किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि अस्पतालों में रक्त की जरूरत लगातार बनी रहती है। हर साल रक्त की मांग में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

ऐसे में नियमित रक्तदान और ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है।

धार्मिक सौहार्द के साथ मानवता का संदेश

ईद मिलादुन्नबी और रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित यह रक्तदान शिविर सामाजिक सौहार्द और मानवता की मिसाल बना।

शिविर में अलग-अलग वर्गों के लोगों ने रक्तदान कर जरूरतमंद मरीजों की मदद का संकल्प दोहराया।

आयोजकों का कहना है कि ब्लड बैंक की क्षमता और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए रक्त संग्रह किया गया।

इसके बावजूद लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने का प्रयास जारी रहेगा।

https://regionalreporter.in/srinagar-muslim-community-blood-donation-camp-105-donors/
https://youtu.be/LwK69aMkayY?si=wHVnp8MENJKJ6D3K
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