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उत्तराखंड में 42 राजकीय विद्यालय होंगे अपग्रेड

448 अस्थायी पद भी मंजूर; 5 साल में 826 स्कूल हुए बंद

उत्तराखंड सरकार का शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला, 7 स्कूल हाईस्कूल और 35 विद्यालय इंटर स्तर पर होंगे उच्चीकृत

उत्तराखंड शासन ने प्रदेश के 42 राजकीय विद्यालयों के उच्चीकरण को मंजूरी दे दी है।

इनमें सात राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों को हाईस्कूल स्तर पर अपग्रेड किया जाएगा।

वहीं, 35 राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को इंटरमीडिएट स्तर पर उच्चीकृत किया जाएगा।

सरकार ने इन विद्यालयों के संचालन के लिए कुल 448 अस्थायी पद सृजित करने की भी मंजूरी दी है।

इस संबंध में सचिव ज्योति यादव ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक को शासनादेश जारी किया है।

सात जूनियर हाईस्कूल बनेंगे हाईस्कूल

शासनादेश के अनुसार सात राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों को हाईस्कूल स्तर पर उच्चीकृत किया जाएगा।

इनमें ऊधमसिंह नगर के पत्थरचट्टा और धीमरी ब्लॉक के विद्यालय शामिल हैं।

उत्तरकाशी का लिवाड़ी और बागेश्वर के भगरतोला, वाछम और धन्यारी विद्यालय भी सूची में हैं।

इसके अलावा चंपावत जिले के धासम स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय को भी हाईस्कूल बनाया जाएगा।

35 हाईस्कूल अब बनेंगे इंटर कॉलेज

सरकार ने 35 राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को इंटरमीडिएट स्तर पर अपग्रेड करने की मंजूरी दी है।

इनमें ऊधमसिंह नगर के मानपुर, शिवलालपुर, अमरझंडा, सिसौना और शहेदौरा शामिल हैं।

टिहरी के मेड़, भिलंगना, टिहरी, थान, कौशल और पजैगांव विद्यालय भी अपग्रेड होंगे।

उत्तरकाशी के कफनौल और चंपावत के सिल्ली, पल्सों और डुगरालेटी विद्यालय भी सूची में हैं।

पौड़ी के कुटखाल, चोपताखाल, तिलधारखाल और माला विद्यालयों को भी इंटर स्तर मिलेगा।

इसके अलावा नैनीताल के बड़ौन, कैंडागांव, नाईसेला और कूल रामगढ़ विद्यालय शामिल हैं।

अल्मोड़ा के खाकर, चगेठी और काटली विद्यालय भी इंटरमीडिएट स्तर पर होंगे।

रुद्रप्रयाग के बाछ्व, कालीमठ और किरोड़ा विद्यालयों का भी उच्चीकरण होगा।

चमोली के कर्नोल, मानमती, विजयसैन और पिण्डवाली विद्यालय भी इंटर स्तर पर होंगे।

बागेश्वर के जयड़ेरा और पिथौरागढ़ के पोखरी व हिमतड़ विद्यालय भी सूची में शामिल हैं।

देहरादून के सहसपुर क्षेत्र के कैंचीवाला और बिरसनी विद्यालयों को भी इंटरमीडिएट स्तर पर अपग्रेड किया जाएगा।

हाईस्कूल के लिए 63 अस्थायी पद मंजूर

हाईस्कूल स्तर पर अपग्रेड किए जाने वाले सात विद्यालयों के लिए 63 अस्थायी पद स्वीकृत किए गए हैं।

इनमें प्रत्येक विद्यालय के लिए एक प्रधानाध्यापक का पद शामिल है।

इसके अलावा हिंदी, आधुनिक भारतीय भाषा अथवा अंग्रेजी-संस्कृत के शिक्षक पद होंगे।

गणित, गृह विज्ञान, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और कला शिक्षा के पद भी स्वीकृत किए गए हैं।

छात्र संख्या के आधार पर एक अतिरिक्त विषय का शिक्षक भी रखा जा सकेगा।

प्रधानाध्यापक के पद का वेतनमान लेवल-10 में 56,100 से 1,77,500 रुपये है।

सहायक अध्यापक एलटी का वेतनमान लेवल-7 में 44,900 से 1,42,400 रुपये निर्धारित है।

इंटर कॉलेजों में 385 अस्थायी पद

इंटरमीडिएट स्तर पर उच्चीकृत किए जा रहे 35 विद्यालयों के लिए 385 पद सृजित किए गए हैं।

हर विद्यालय में एक प्रधानाचार्य और दस प्रवक्ता के पद स्वीकृत किए गए हैं।

प्रधानाचार्य का वेतनमान लेवल-12 में 78,800 से 2,09,200 रुपये निर्धारित है।

वहीं प्रवक्ता का वेतनमान लेवल-8 में 47,600 से 1,51,100 रुपये रहेगा।

शासनादेश के मुताबिक ये पद आदेश जारी होने या नियुक्ति की तारीख से 28 फरवरी 2027 तक प्रभावी रहेंगे।

जरूरत पड़ने पर सरकार इन पदों को तय अवधि से पहले भी समाप्त कर सकती है।

पुराने शिक्षकों का भी होगा समायोजन

उच्चीकरण वाले जूनियर हाईस्कूलों में पहले से सृजित पद समर्पित माने जाएंगे।

वहां कार्यरत प्रधानाध्यापक और शिक्षकों को तीन महीने के भीतर अन्य विद्यालयों में समायोजित किया जाएगा।

हाईस्कूल से इंटर स्तर पर अपग्रेड होने वाले विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाध्यापकों का भी नियमानुसार समायोजन होगा।

इस पूरी प्रक्रिया का खर्च वित्तीय वर्ष 2026-27 के माध्यमिक शिक्षा बजट से किया जाएगा।

एक तरफ अपग्रेडेशन, दूसरी तरफ 826 स्कूलों पर लगा ताला

उत्तराखंड सरकार एक तरफ विद्यालयों को अपग्रेड कर शिक्षा सुविधाएं बढ़ा रही है।

वहीं, प्रदेश में सरकारी स्कूलों की घटती छात्र संख्या भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

विधानसभा में मार्च 2026 में शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने स्कूल बंद होने का आंकड़ा साझा किया था।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2020 से 2025 के बीच उत्तराखंड में 826 सरकारी प्राथमिक विद्यालय बंद हुए

इन स्कूलों में छात्र नामांकन नहीं होने के कारण उन्हें बंद करना पड़ा।

सबसे ज्यादा असर पहाड़ी जिलों में देखने को मिला है।

टिहरी गढ़वाल में सबसे ज्यादा 262 प्राथमिक विद्यालय बंद हुए

इसके बाद पौड़ी गढ़वाल में 120 और पिथौरागढ़ में 104 स्कूल बंद हुए।

अल्मोड़ा में भी 83 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों पर ताला लगा।

यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है, जब सरकार 42 विद्यालयों को उच्चीकृत कर रही है।

ऐसे में विद्यालयों का उच्चीकरण एक तरफ नई सुविधाओं की उम्मीद जगाता है।

दूसरी तरफ घटती छात्र संख्या और बंद होते स्कूल पहाड़ों की शिक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती भी दिखाते हैं।

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