गंभीर पीलिया और रक्त संक्रमण से बिगड़ी थी हालत, दो बार एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन और कृत्रिम सांस देकर बचाया
श्रीनगर। हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल श्रीनगर के बाल रोग विभाग की टीम ने गंभीर हालत में पहुंचे एक नवजात का सफल उपचार किया है।
जन्म के बाद नवजात में तेजी से पीलिया बढ़ रहा था और शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से टूट रही थीं।
इसके साथ ही रक्त संक्रमण की समस्या सामने आने से उसकी हालत और गंभीर हो गई।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए चिकित्सकों ने नवजात का दो बार एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन किया।
इसके अलावा आईवीआईजी की दो खुराक दी गईं और हालत बिगड़ने पर दो बार कृत्रिम सांस की सहायता भी दी गई।
कई दिनों तक चले उपचार और लगातार निगरानी के बाद नवजात की हालत में सुधार हुआ। स्वस्थ होने के बाद उसे अस्पताल से घर भेज दिया गया।
मां और बच्चे के रक्त समूह में थी असंगति
श्रीकोट श्रीनगर निवासी गिरीश पुरोहित की पत्नी करिश्मा ने 16 अगस्त को बेस अस्पताल में नवजात को जन्म दिया था।
जांच में मां का रक्त समूह आरएच निगेटिव और बच्चे का आरएच पॉजिटिव पाया गया।
रक्त समूह में इस असंगति के कारण नवजात के शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से टूटने लगीं।
इससे बिलीरुबिन का स्तर बढ़ता गया और पीलिया गंभीर स्थिति में पहुंच गया।
गंभीर हालत को देखते हुए नवजात को अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भर्ती किया गया।
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सीएम शर्मा और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंकिता गिरी की देखरेख में उपचार शुरू हुआ।

दो बार किया गया एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन
डॉ. अंकिता गिरी के अनुसार, नवजात में पीलिया लगातार बढ़ रहा था और रक्त कोशिकाएं तेजी से टूट रही थीं।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दो बार एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन किया गया।
इसके साथ ही आईवीआईजी की दो खुराक दी गईं। हालत गंभीर होने पर नवजात को दो बार कृत्रिम सांस की सहायता भी देनी पड़ी।
चिकित्सकों की लगातार निगरानी और उपचार के बाद नवजात की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार आया। कुछ दिनों के उपचार के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया।
परिवार ने डॉक्टरों और स्टाफ का जताया आभार
बच्चे को स्वस्थ देखकर पिता गिरीश पुरोहित भावुक हो गए।
परिवार ने बाल रोग विभाग के चिकित्सकों और अस्पताल के पूरे स्टाफ का आभार जताया।
उपचार में बाल रोग विभाग के एसआर डॉ. अजय गोस्वामी, जेआर डॉ. महेश, डॉ. धीरज, डॉ. अंजलि और डॉ. दानिश सहित नर्सिंग अधिकारियों ने सहयोग किया।
आरएच निगेटिव गर्भवती महिलाएं बरतें सावधानी
डॉ. अंकिता गिरी ने आरएच निगेटिव रक्त समूह वाली गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
उन्होंने कहा कि ऐसी महिलाओं को स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार एंटी-डी इम्युनोग्लोबुलिन लगवाना चाहिए।
इससे आरएच असंगति से जुड़ी संभावित जटिलताओं का जोखिम कम करने में मदद मिलती है।
उन्होंने आरएच निगेटिव महिलाओं से नियमित जांच कराने और विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह का पालन करने की अपील की।















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