1592 शिक्षकों-कर्मचारियों के तबादलों के बाद विवाद, बीमारी और तलाक जैसी श्रेणियों के आधार पर मिले तबादले
उत्तराखंड शिक्षा विभाग में शिक्षकों के अनुरोध के आधार पर हुए तबादलों को लेकर नया विवाद सामने आया है।
कुछ शिक्षिकाओं द्वारा सुगम क्षेत्रों में तैनाती पाने के लिए तलाक की श्रेणी का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, विभागीय सूत्रों ने कुछ मामलों में पति-पत्नी के बीच कथित कागजी तलाक के जरिए तबादला लाभ लेने की बात कही है।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
ऐसे में इन मामलों को फिलहाल आरोप या विभागीय जांच का विषय मानना ही उचित है।
1592 शिक्षकों और कर्मचारियों के हुए तबादले
शिक्षा विभाग ने अनुरोध के आधार पर इस बार 1592 शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादले किए हैं।
यह प्रक्रिया उत्तराखंड स्थानांतरण अधिनियम के तहत निर्धारित प्रावधानों के आधार पर की गई।
इसके अलावा, दो हजार से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों ने अनुरोध के आधार पर तबादले के लिए आवेदन किया था।
विभाग ने पात्रता और उपलब्ध पदों के आधार पर तबादलों की प्रक्रिया पूरी की।
किन आधारों पर मिल सकता है तबादला?
स्थानांतरण अधिनियम में कुछ विशेष परिस्थितियों में अनुरोध के आधार पर तबादले का प्रावधान है।
इनमें बीमारी जैसी परिस्थितियों के साथ तलाकशुदा, विधवा या विधुर कर्मचारी भी शामिल हैं।
इसी प्रावधान के चलते तलाक की श्रेणी में आने वाले कर्मचारियों को
भी अनुरोध के आधार पर तबादले में लाभ मिल सकता है।
विवाद इस बात को लेकर है कि क्या कुछ लोगों ने इस प्रावधान का गलत इस्तेमाल किया।
विभागीय स्तर पर ऐसे मामलों की जांच किए जाने की बात कही गई है।
बीमारी के आधार पर तबादले के लिए शपथ पत्र जरूरी
इस बार माता-पिता अथवा सास-ससुर की बीमारी के आधार पर तबादला पाने वाले शिक्षकों के लिए विभाग ने अतिरिक्त शर्त भी रखी है।
ऐसे कर्मचारियों को शपथ पत्र देना होगा कि वे संबंधित बीमार माता-पिता या सास-ससुर की देखभाल करेंगे।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, यदि कर्मचारी शपथ पत्र में दी गई जिम्मेदारी का पालन नहीं करता है, तो तबादला निरस्त किया जा सकता है।
18 से 20 साल दुर्गम में सेवा का भी मुद्दा
शिक्षक संगठनों और कर्मचारियों के बीच लंबे समय से दुर्गम क्षेत्रों में सेवा और सुगम क्षेत्रों में तबादले का मुद्दा उठता रहा है।
कई शिक्षक और शिक्षिकाएं लंबे समय से पर्वतीय तथा कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में तैनात हैं।
ऐसे कर्मचारियों के लिए सुगम क्षेत्रों में स्थानांतरण बड़ी प्राथमिकता रहा है।
दूसरी ओर, विभाग में ऐसे कर्मचारियों की मौजूदगी का भी सवाल उठता रहा है, जिन्होंने लंबे समय तक सुगम क्षेत्रों में ही सेवा की है।
हाईकोर्ट में भी पहुंच चुका है तबादलों का मामला
उत्तराखंड में शिक्षकों के तबादलों को लेकर मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है।
हाल में हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार से तबादला नीति और संबंधित दिशा-निर्देशों की जानकारी मांगी गई।
इससे स्पष्ट है कि शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया को लेकर नियमों और उनके क्रियान्वयन पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
जांच में सामने आएगा सच
“कागजी तलाक” के आरोपों पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल इन्हें
किसी आधिकारिक जांच के अंतिम निष्कर्ष के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।
यदि विभागीय जांच में यह साबित होता है कि किसी कर्मचारी ने गलत दस्तावेज
या गलत जानकारी देकर तबादला हासिल किया है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है।
शिक्षा विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि ऐसे मामलों की वास्तविक संख्या कितनी है और क्या किसी ने तबादला नियमों का दुरुपयोग किया है।















Leave a Reply