सातवें दिन भी जारी है खोज और बचाव अभियान, हाइड्रोपावर टनलों में फंसे लोगों को निकालने पर फोकस
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के सातवें दिन भी राहत और बचाव अभियान जारी है।
बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है।
नेपाल सरकार के ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक 903 शव बरामद किए जा चुके हैं।
वहीं करीब 4,247 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों से 10,451 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।
903 मौतें, 4,247 लोग अब भी लापता
नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार, आठ प्रमुख प्रभावित जिलों से शव बरामद किए गए हैं।
सबसे ज्यादा शव चितवन में मिले हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट, नवलपरासी वेस्ट, गोरखा, नुवाकोट, धादिंग, तनहुन और रसुवा से भी शव बरामद हुए हैं।
लापता लोगों में स्थानीय नागरिकों के साथ सुरक्षा बलों के जवान और विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
आधिकारिक आंकड़ों में 591 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी भी दी गई है।
10,451 लोगों का रेस्क्यू
NDRRMA के अनुसार, बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 10,451 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में नेपाल पुलिस, नेपाली सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स के करीब 20,899 जवान तैनात किए गए हैं।
हेलीकॉप्टर के जरिए भी बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।
अब तक सैकड़ों हेलीकॉप्टर उड़ानें राहत और बचाव अभियान के लिए संचालित की जा चुकी हैं।
हाइड्रोपावर टनलों में फंसे मजदूरों की तलाश
बचाव अभियान का सबसे मुश्किल हिस्सा हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे मजदूरों तक पहुंचना है।
रसुवा और नुवाकोट में कई परियोजनाओं के मजदूर बाढ़ के बाद संपर्क से बाहर हैं।
एक उद्योग संगठन के अनुसार, प्रभावित इलाकों की 11 हाइड्रोपावर परियोजनाओं में करीब 897 कर्मचारी संपर्क से बाहर बताए गए हैं।
कई सुरंगों में पानी, कीचड़ और मलबा भर गया है। रास्ते और सुरंग के प्रवेश द्वार क्षतिग्रस्त होने से बचाव दलों के लिए अंदर पहुंचना बेहद मुश्किल बना हुआ है।
चिलिमे हाइड्रोपावर टनल में भी रेस्क्यू
रसुवा जिले में चिलिमे हाइड्रोपावर परियोजना की सुरंग में भी बचाव अभियान चलाया गया।
भारतीय विशेषज्ञों और नेपाली सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम सुरंग के अंदर पहुंची।
यहां करीब 100 मीटर अंदर तक जाने के बाद मलबे और कीचड़ के कारण आगे बढ़ना मुश्किल हुआ।
चिलिमे परियोजना की सुरंग से दो शव बरामद किए जा चुके हैं। वहीं अपर त्रिशूली-1 परियोजना की सुरंग से भी एक शव मिलने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल के अन्य हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में भी खोज अभियान जारी है।
विशेषज्ञ सुरंगों में ड्रोन, सर्चलाइट और विशेष उपकरणों की मदद ले रहे हैं।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल में राहत और बचाव अभियान में भारत भी सक्रिय रूप से सहयोग कर रहा है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 158 भारतीय नागरिकों को नेपाल से सुरक्षित निकाला गया है।
भारत की विशेष फोरेंसिक टीम काठमांडू में नेपाल पुलिस की फोरेंसिक साइंस लैब के साथ मिलकर काम कर रही है।
टीम मृतकों की पहचान और DNA संबंधी प्रक्रिया में मदद कर रही है।
भारत की विशेष टनल रेस्क्यू टीम भी नेपाली सेना के साथ चिलिमे और लांगटांग क्षेत्र में अभियान चला रही है।
चीन और दक्षिण कोरिया की टीमें भी अभियान में शामिल
नेपाल में अंतरराष्ट्रीय राहत और बचाव प्रयास भी तेज हुए हैं। भारत के साथ चीन और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों में पहुंची हैं।
इन टीमों का मुख्य फोकस हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचना और विशेष तकनीकी उपकरणों की मदद से मलबा हटाना है।
त्रिशूली क्षेत्र में कारोबार पूरी तरह तबाह
बाढ़ ने नुवाकोट और त्रिशूली क्षेत्र के स्थानीय कारोबार को भी भारी नुकसान पहुंचाया है।
कई दुकानें, वाहन और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बह गए। पोल्ट्री कारोबार से जुड़े लोगों ने भी लाखों रुपये के नुकसान की बात कही है।
बाढ़ के तेज बहाव ने सड़क और पुलों को नुकसान पहुंचाया है।
इससे कई प्रभावित इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
बचाव अभियान के साथ शवों की पहचान भी चुनौती
बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव बरामद होने के कारण उनकी पहचान प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
कई शवों को अलग-अलग अस्पतालों में रखा गया है। फोरेंसिक विशेषज्ञ DNA और अन्य वैज्ञानिक तरीकों से मृतकों की पहचान में जुटे हैं।
इसी वजह से भारत की फोरेंसिक टीम भी नेपाल में स्थानीय विशेषज्ञों के साथ काम कर रही है।
नेपाल सरकार ने राहत के लिए अतिरिक्त फंड जारी किया
नेपाल सरकार ने सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में राहत और पुनर्वास के लिए अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई है।
रसुवा और नुवाकोट को राहत कार्यों के लिए एक-एक करोड़ नेपाली रुपये दिए गए हैं।
धादिंग को 50 लाख नेपाली रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।
इसके अलावा प्रभावित स्थानीय निकायों के लिए भी अतिरिक्त फंड जारी किया गया है।
प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, दवाइयां और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
आधिकारिक और संयुक्त आंकड़ों में अंतर
नेपाल सरकार के 31 अगस्त के आधिकारिक आंकड़ों में 903 मौतें और 4,247 लोग लापता बताए गए थे।
वहीं 1 सितंबर को प्रकाशित कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में नेपाल और तिब्बत को मिलाकर मौतों का आंकड़ा 939 से 955 के बीच बताया गया है।
ये संयुक्त आंकड़े नेपाल के आधिकारिक 903 के आंकड़े से अलग हैं।
इसलिए नेपाल की स्थिति रिपोर्ट करते समय 903 मौतों को नेपाल का आधिकारिक आंकड़ा और संयुक्त आंकड़े को अलग से बताना ज्यादा सटीक रहेगा।
सातवें दिन भी उम्मीद बरकरार
बाढ़ के सात दिन बाद भी परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में जुटे हैं।
खासकर हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले लोगों के परिजन अभी भी उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
बचाव दल मलबे, पानी से भरी सुरंगों और कठिन पहाड़ी इलाकों में लगातार अभियान चला रहे हैं।
प्रशासन का पूरा फोकस लोगों को बचाने, लापता लोगों को तलाशने और मृतकों की पहचान पर है।
कैसे आई इतनी भयावह बाढ़
यह आपदा 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास शुरू हुई।
शुरुआती आकलनों के मुताबिक बर्फ और चट्टानों के खिसकने से अचानक भारी मात्रा में पानी, मलबा और कीचड़ नीचे की ओर बहा।
इस तेज बहाव ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों को प्रभावित किया।
देखते ही देखते घर, दुकानें, सड़कें, पुल और दूसरी जरूरी संरचनाएं इसकी चपेट में आ गईं।
कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी भारी नुकसान हुआ।
कई परियोजनाओं की सुरंगों और भूमिगत पावरहाउस में काम कर रहे मजदूरों के लापता होने की सूचना है।















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