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पिथौरागढ़ की यशस्वी ने निशाने से बनाई अलग पहचान

तीन साल भारतीय टीम का रहीं हिस्सा

पहाड़ की बेटियां अब खेल के मैदान में लगातार अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।

पिथौरागढ़ की यशस्वी जोशी भी ऐसी ही प्रतिभाशाली निशानेबाज हैं।

यशस्वी ने शूटिंग में मेहनत और निरंतर अभ्यास के दम पर राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई है।

उनकी उपलब्धियां प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन रही हैं।

जूनियर एशियन चैंपियनशिप में जीता रजत पदक

यशस्वी ने वर्ष 2022 में आयोजित जूनियर एशियन चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन किया था। इस प्रतियोगिता में उन्होंने रजत पदक अपने नाम किया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस उपलब्धि के बाद भारतीय शूटिंग टीम में उनकी जगह मजबूत हुई।

यशस्वी लगातार तीन वर्षों तक भारतीय टीम का हिस्सा रहीं और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया।

पांच साल से उत्तराखंड की बेस्ट शूटर

यशस्वी के कोच अक्षय आनंद के अनुसार, उनकी निरंतरता भी उनकी बड़ी ताकत है। वह पिछले पांच वर्षों से उत्तराखंड की बेस्ट शूटर का खिताब हासिल करती आ रही हैं।

प्रतियोगिताओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन और शानदार स्कोर के चलते उन्हें यह सम्मान मिलता रहा है।

लगातार पांच वर्षों तक उपलब्धि बनाए रखना उनके अनुशासन और अभ्यास को दर्शाता है।

सात बार नेशनल में कर चुकी हैं प्रतिनिधित्व

यशस्वी ने राष्ट्रीय स्तर पर भी उत्तराखंड का कई बार प्रतिनिधित्व किया है।

वह अब तक सात बार नेशनल प्रतियोगिताओं में राज्य की ओर से हिस्सा ले चुकी हैं।

इसके अलावा वह तीन बार नेशनल गेम्स और दो बार खेलो इंडिया में भी प्रतिभाग कर चुकी हैं।

राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन के कारण उन्होंने राज्य की उभरती निशानेबाजों में अपनी पहचान बनाई है।

11 साल की उम्र में शुरू किया शूटिंग का सफर

यशस्वी ने महज 11 वर्ष की उम्र से शूटिंग की ट्रेनिंग शुरू कर दी थी। जूनियर और यूथ कैटेगरी में भी वह कई पुरस्कार अपने नाम कर चुकी हैं।

पिथौरागढ़ से शुरू हुआ उनका यह सफर भारतीय टीम तक पहुंचा। लगातार अभ्यास और प्रतियोगिताओं के अनुभव ने उनके खेल को नई ऊंचाई दी है।

पढ़ाई के साथ खेल पर भी पूरा फोकस

यशस्वी खेल के साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखे हुए हैं। वर्तमान में वह ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रही हैं।

पढ़ाई और शूटिंग के बीच संतुलन बनाकर वह अपने खेल कॅरिअर को आगे बढ़ा रही हैं।

उनकी कहानी उन युवाओं के लिए खास संदेश है, जो खेलों में कॅरिअर बनाने का सपना देखते हैं।

सीमित संसाधनों वाले पहाड़ी क्षेत्रों से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचना आसान नहीं होता।

यशस्वी की उपलब्धियां बताती हैं कि प्रतिभा के साथ निरंतर मेहनत हो तो मंजिल हासिल की जा सकती है।

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