पिथौरागढ़ में बाढ़ का अलर्ट
नेपाल के दार्चुला जिले में भारी भूस्खलन के बाद चमेलिया नदी का बहाव आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है।
इससे पिथौरागढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
भूस्खलन के कारण नदी में भारी मलबा जमा हो गया है। इससे नदी के पीछे पानी जमा होने और अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है।
भट्टाड़ में पहाड़ी का बड़ा हिस्सा नदी में गिरा
यह भूस्खलन नेपाल के दार्चुला जिले के अपिहिमाल ग्रामीण नगरपालिका-1 के भट्टाड़ क्षेत्र में हुआ। पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर चमेलिया नदी में गिर गया।
मलबे के कारण नदी करीब आधे घंटे तक पूरी तरह बाधित रही। इसके बाद पानी मलबे के बीच से निकलने लगा। फिलहाल नदी का करीब आधा हिस्सा बह रहा है।
15 परिवार सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट
भूस्खलन के बाद नेपाल के भट्टाड़ क्षेत्र में नदी किनारे रहने वाले 15 परिवारों को सुरक्षित स्थान पर भेजा गया है।
लगातार बारिश के कारण पहाड़ी का और हिस्सा टूटने की आशंका बनी हुई है।
नेपाल प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
चमेलिया, अपर चमेलिया और अन्य जलविद्युत परियोजनाओं की सुरक्षा पर भी नजर रखी जा रही है।
पिथौरागढ़ में प्रशासन अलर्ट
नेपाल की स्थिति को देखते हुए पिथौरागढ़ जिला प्रशासन ने भी निगरानी बढ़ा दी है। पुलिस, एसएसबी और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क किया गया है।
झूलाघाट और काली नदी किनारे बसे क्षेत्रों के लोगों को नदी के पास नहीं जाने की सलाह दी गई है।
प्रशासन संभावित जलस्तर बढ़ने की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र सिंह महार के अनुसार, फिलहाल काली नदी का जलस्तर सामान्य है।
हालांकि संभावित खतरे को देखते हुए एसएसबी और आईटीबीपी को भी तैयार रहने को कहा गया है।
चमेलिया का पानी काली नदी में मिलता है
चमेलिया नदी आगे चलकर नेपाल के सेरा और भारतीय क्षेत्र गेठीगाड़ा के पास काली नदी में मिलती है। इसके बाद काली नदी भारत-नेपाल सीमा के साथ आगे बढ़ती है।
काली नदी के किनारे झूलाघाट और पंचेश्वर जैसे क्षेत्र आते हैं। इसके बाद नदी टनकपुर की दिशा में आगे बढ़ती है।
इस वजह से नेपाल में नदी का बहाव अचानक बढ़ने पर भारतीय सीमावर्ती क्षेत्रों में भी असर पड़ सकता है।
अभी भारत में बाढ़ की स्थिति नहीं
फिलहाल भारतीय क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति सामने नहीं आई है। काली नदी का जलस्तर भी सामान्य बताया गया है।
हालांकि खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अगर लगातार बारिश से नदी में और मलबा गिरा और प्रवाह पूरी तरह रुक गया, तो पानी का दबाव बढ़ सकता है।
इसके बाद प्राकृतिक मलबा बांध टूटने पर अचानक तेज बहाव आने की आशंका रहेगी।
यही स्थिति पिथौरागढ़ के नदी किनारे वाले क्षेत्रों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है।
अभी कृत्रिम झील का आकार स्पष्ट नहीं
भूस्खलन के बाद नदी के पीछे पानी जमा हुआ है। कई रिपोर्टों में इसे कृत्रिम झील बनने की स्थिति बताया गया है।
हालांकि जलभराव की लंबाई, चौड़ाई, गहराई और पानी की कुल मात्रा का कोई आधिकारिक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। इसलिए इसे बड़ी झील कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
नेपाल के अधिकारियों के अनुसार, नदी का पानी अभी मलबे के बीच से निकल रहा है और तत्काल कोई बड़ा खतरा नहीं बताया गया है।
जलविद्युत परियोजनाओं पर भी नजर
भूस्खलन स्थल से ऊपर बलांच क्षेत्र में चमेलिया नदी पर कई जलविद्युत परियोजनाएं हैं।
इनमें 30 मेगावाट की चमेलिया जलविद्युत परियोजना और अपर चमेलिया परियोजना शामिल हैं।
नदी के प्रवाह में बदलाव के बाद इन परियोजनाओं की सुरक्षा और जलस्तर पर भी निगरानी रखी जा रही है।















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