CSIR NET-JRF में AIR 138
पहाड़ के छोटे से गांव से निकलकर रुद्रप्रयाग के आशीष गुसाईं ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
बावई गांव निवासी आशीष ने CSIR-UGC NET-JRF 2026 में ऑल इंडिया रैंक 138 हासिल की है।
आशीष गढ़वाल विश्वविद्यालय से एमएससी भौतिक विज्ञान की पढ़ाई कर चुके हैं।
वर्तमान में वह IIT दिल्ली में M.Tech की पढ़ाई कर रहे हैं।
CSIR NET-JRF में हासिल की शानदार रैंक
आशीष की सफलता इसलिए खास है, क्योंकि उन्होंने देशभर के अभ्यर्थियों के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए JRF के लिए जगह बनाई है।
उनकी उपलब्धि से गांव, रुद्रप्रयाग और गढ़वाल विश्वविद्यालय में खुशी का माहौल है।
NTA ने CSIR-UGC NET जून 2026 का परिणाम घोषित किया है।
यह परीक्षा विज्ञान विषयों में जूनियर रिसर्च फेलोशिप और असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए पात्रता निर्धारित करती है।
इस परीक्षा में 1,50,057 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें से 1,413 अभ्यर्थी JRF के लिए सफल घोषित किए गए हैं।
परीक्षा पांच विषयों- केमिकल साइंसेज, लाइफ साइंसेज, मैथेमेटिकल साइंसेज, फिजिकल साइंसेज और अर्थ साइंसेज में हुई।
गढ़वाल विश्वविद्यालय से IIT दिल्ली तक का सफर
आशीष ने गढ़वाल विश्वविद्यालय से भौतिक विज्ञान में एमएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए IIT दिल्ली का रुख किया।
पढ़ाई के दौरान लगातार मेहनत और वैज्ञानिक विषयों में रुचि ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार किया।
अब CSIR NET-JRF में AIR 138 हासिल करना उनके अकादमिक सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धि बन गया है।
पहाड़ के युवाओं के लिए प्रेरणा
बावई जैसे छोटे गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में यह रैंक हासिल करना आशीष के लिए ही नहीं, बल्कि पहाड़ के दूसरे युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है।
उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद लगातार मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।
CSIR-UGC NET को देश में विज्ञान और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा माना जाता है।
JRF के माध्यम से सफल अभ्यर्थियों को शोध क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
परिजनों और क्षेत्रवासियों ने जताई खुशी
आशीष की इस उपलब्धि पर उनके परिजनों, शिक्षकों और क्षेत्रवासियों ने खुशी जताई है।
लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
आशीष की सफलता ने एक बार फिर यह दिखाया है कि उत्तराखंड के पहाड़ों से निकलने वाली प्रतिभाएं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना सकती हैं।

















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