अब घरों तक पाइप से पानी पहुंचाएगा जल संस्थान
ज्योलीकोट में दूषित पानी से फैली बीमारी के बाद हालात सामान्य करने की कोशिश जारी है,
लेकिन ग्रामीणों के सामने अब साफ पानी की नई चुनौती खड़ी हो गई है।
दूषित पेयजल की सप्लाई बंद होने के बाद प्रशासन ने टैंकरों के जरिए वैकल्पिक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की।
हालांकि पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह व्यवस्था कई इलाकों में पर्याप्त साबित नहीं हो रही है।
कई गांवों में ग्रामीणों को टैंकर से पानी लेने के लिए सड़क तक पहुंचना पड़ रहा है।
दूर-दराज के इलाकों में लोगों को डेढ़ से दो किलोमीटर तक पैदल चलकर पानी लाने की शिकायतें सामने आई हैं।
सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों को हो रही है, जहां सदस्य बीमारी से जूझ रहे हैं।
ऐसे परिवारों के सामने मरीज की देखभाल और पानी जुटाने की दोहरी चुनौती बनी हुई है।
सड़क तक टैंकर, घरों तक पानी पहुंचाना चुनौती
ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पानी की वजह से बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए हैं।
अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर भी दबाव बना हुआ है।
तीन मौतों के बाद प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं को अलर्ट किया है। क्षेत्र के अस्पताल को 24 घंटे संचालित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, दूषित पानी की सप्लाई रोककर लोगों के लिए टैंकरों से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
लेकिन सड़क से दूर बसे गांवों में टैंकर का पानी घर तक पहुंचाना मुश्किल बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें ऐसी व्यवस्था चाहिए, जिसमें सड़क तक जाकर पानी भरने की मजबूरी खत्म हो।
लोगों की मांग सिर्फ पानी की नहीं, बल्कि सुरक्षित पेयजल की है।
जल संस्थान ने शुरू किया नया इंतजाम
जल संस्थान के अधिकारियों के मुताबिक, टैंकर से पानी लेकर दूर स्थित घरों तक पहुंचने में लोगों को परेशानी हो रही है।
इसलिए अब वैकल्पिक व्यवस्था को गांवों के करीब ले जाने का प्रयास किया जा रहा है।
इसके तहत ऐसे गांवों को चिह्नित किया जा रहा है, जो मुख्य सड़क से काफी दूर हैं।
इन स्थानों पर पाइप लाइन को बीच से जोड़कर टैंकर का पानी आगे पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।
कुछ गांवों में यह काम शुरू भी कर दिया गया है। जल संस्थान का लक्ष्य है कि दूरस्थ क्षेत्रों में पर्याप्त पानी उपलब्ध हो, ताकि ग्रामीण तीन से चार दिन तक पानी सुरक्षित रख सकें।
ज्योलीकोट के कॉन्वेंट स्कूल में भी सामने आई लापरवाही
दूषित पानी के संकट के बीच ज्योलीकोट के सेंट एंथोनीज कॉन्वेंट स्कूल में पेयजल व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं।
जल संस्थान की जांच में स्कूल परिसर की पानी की टंकियों में अस्वच्छ पानी मिलने के बाद प्रशासन ने पेयजल के इस्तेमाल और वितरण पर रोक लगा दी है।
न्यायालय उप जिलाधिकारी एवं परगना मजिस्ट्रेट, नैनीताल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 152(1) के तहत आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।
निर्देशों के अनुसार टंकियों की पूरी तरह सफाई और विसंक्रमण कराया जाना है।
साथ ही पानी के नमूने अधिकृत प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजने को कहा गया है।
टैंक की सफाई में निकली मिट्टी और गंदा पानी
जांच के दौरान स्कूल की पानी की टंकियों की स्थिति सामने आने के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की। सफाई के दौरान टैंक से गंदा पानी और बड़ी मात्रा में मिट्टी निकली।
जांच में यह भी सामने आया कि स्कूल का पानी कनेक्शन जल संस्थान या जल निगम से नहीं था।
स्कूल प्रबंधन ने एक प्राकृतिक स्रोत से पाइपलाइन के जरिए टैंक तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की थी।
बताया गया कि टैंक की लंबे समय से सफाई नहीं हुई थी।
इसी बीच स्कूल के कई बच्चे बीमार हुए, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने अग्रिम आदेश तक स्कूल बंद रखने के निर्देश दिए थे।
13 सितंबर तक व्यवस्था सुधारने के निर्देश
प्रशासन ने स्कूल प्रबंधन को विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित एवं मानकयुक्त वैकल्पिक पेयजल की व्यवस्था करने को कहा है।
निर्देशों के मुताबिक, जब तक पानी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता, तब तक संबंधित स्रोत का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
विद्यालय प्रबंधन को 13 सितंबर 2026 तक जरूरी कार्रवाई पूरी करनी होगी। इसके बाद 14 सितंबर को अनुपालन रिपोर्ट न्यायालय में पेश करनी होगी।
ज्योलीकोट में अब चुनौती केवल बीमारी पर नियंत्रण की नहीं है।
प्रशासन के सामने ग्रामीणों को लगातार सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत करना भी बड़ी जिम्मेदारी है।

















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