खेलो यूके पोर्टल विवाद में FIR, कंपनी ने भुगतान को लेकर उठाए सवाल
उत्तराखंड खेल विभाग के आधिकारिक खेलो यूके पोर्टल (kheloUK.org) का एडमिन एक्सेस बंद होने के बाद विवाद गहरा गया है।
विभाग ने सेवा प्रदाता कंपनी खेलो टेक इंडिया के CEO अंशुल बगई के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया है।
विभाग का आरोप है कि पोर्टल के एडमिन क्रेडेंशियल्स में बिना अनुमति बदलाव किया गया।
इसके चलते करीब 3.5 लाख से अधिक पंजीकृत खिलाड़ियों का डेटा और जरूरी दस्तावेज प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
एडमिन एक्सेस बंद होने के बाद बढ़ा विवाद
खेल विभाग के मुताबिक, सेवा प्रदाता कंपनी ने बिना पूर्व सूचना और विभागीय अनुमति के पोर्टल के एडमिन क्रेडेंशियल्स बदल दिए।
इसके बाद विभागीय स्तर पर पोर्टल का एक्सेस प्रभावित हुआ।
विभाग का कहना है कि खेल महाकुंभ और आगामी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारियों के बीच यह समस्या सामने आई।
ऐसे में खिलाड़ियों से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड तक पहुंच प्रभावित होना गंभीर विषय है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए खेल विभाग के उपनिदेशक की तहरीर पर पुलिस ने कंपनी के CEO अंशुल बगई के खिलाफ FIR दर्ज की है।
पुलिस और साइबर सेल अब पूरे मामले की तकनीकी जांच कर रहे हैं।
3.5 लाख खिलाड़ियों के डेटा को लेकर आशंका
विभाग को आशंका है कि पोर्टल में दर्ज खिलाड़ियों का व्यक्तिगत डेटा और जरूरी दस्तावेज लीक या चोरी हो सकते हैं।
हालांकि, फिलहाल डेटा चोरी होने की पुष्टि नहीं हुई है और इसकी जांच जारी है।
विशेष खेल सचिव अमित सिन्हा ने कहा कि एडमिन क्रेडेंशियल्स में अनधिकृत बदलाव किए जाने से व्यवस्था प्रभावित हुई।
उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जा रहा है कि इसके पीछे किसकी भूमिका थी।
अमित सिन्हा के मुताबिक, खेल महाकुंभ और आगामी टूर्नामेंट नजदीक होने के कारण विभाग ने मामले में FIR दर्ज कराने का निर्णय लिया।
बकाया भुगतान के दावे की भी होगी जांच
विवाद केवल पोर्टल एक्सेस तक सीमित नहीं है। सेवा प्रदाता कंपनी ने विभाग पर लंबे समय से भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया है।
विशेष खेल सचिव अमित सिन्हा ने कहा कि कंपनी के बकाया भुगतान संबंधी दावों की जांच अनुबंध और संबंधित फाइलों के आधार पर की जाएगी।
यदि कोई वैध भुगतान लंबित पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई होगी।
कंपनी ने डेटा चोरी के आरोपों को बताया बेबुनियाद
दूसरी ओर, खेलो टेक इंडिया के CEO अंशुल बगई ने विभाग के आरोपों को खारिज किया है।
उनका कहना है कि कंपनी और खेल विभाग के बीच अनुबंध 31 मार्च को समाप्त हो चुका था।
बगई के मुताबिक, इसके बावजूद कंपनी ने 24 जुलाई तक मानार्थ आधार पर तकनीकी सहायता जारी रखी।
उन्होंने दावा किया कि RFP और अनुबंध की शर्तों के अनुसार 90 प्रतिशत भुगतान के बाद ही सोर्स कोड और रिपोजिटरी ट्रांसफर की जानी थी।
कंपनी का आरोप है कि विभाग ने करीब 18 महीने से AWS सर्वर का भुगतान नहीं किया है।
बगई ने कहा कि भुगतान को लेकर कंपनी ने विभाग को कई बार ईमेल के माध्यम से सूचित किया था।
CEO बोले- डेटा डाउनलोड नहीं किया गया
अंशुल बगई ने कहा कि पोर्टल और GMS वर्तमान में चल रहे हैं और विभाग के पास डैशबोर्ड का एक्सेस मौजूद है।
ऐसे में 3.5 लाख खिलाड़ियों का डेटा गायब होने या चोरी होने का दावा सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि कंपनी ने किसी खिलाड़ी का डेटा डाउनलोड नहीं किया है।
बगई ने पुलिस और आईटी विभाग को सर्वर लॉग उपलब्ध कराने की बात भी कही है।
उनके अनुसार, लंबे समय से भुगतान में देरी के कारण कंपनी को वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ा।
उन्होंने 8 सितंबर को दर्ज शिकायत को एकतरफा और अनुचित बताया।
पुलिस खंगाल रही सर्वर लॉग और ईमेल
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस और साइबर सेल ने मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है।
जांच में सर्वर लॉग, ईमेल पत्राचार और विभाग-कंपनी के बीच हुए अनुबंध की शर्तों को देखा जा रहा है।
जांच का मुख्य बिंदु यह है कि पोर्टल का एक्सेस किस तरह बदला गया और इसमें किसकी भूमिका थी।
साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि खिलाड़ियों के डेटा का कोई अनधिकृत डाउनलोड या डेटा उल्लंघन हुआ है या नहीं।
फिलहाल मामले में डेटा चोरी की आशंका और कंपनी के भुगतान संबंधी दावे दोनों जांच के दायरे में हैं।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामला केवल अनुबंध और भुगतान विवाद है या इसमें साइबर अपराध से जुड़ी धाराएं भी बनती हैं।

















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