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थराली CHC में आवारा पशुओं का जमावड़ा, मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल

अस्पताल को स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील स्थान माना जाता है।

यहां मरीजों के इलाज के साथ दवाइयों और मेडिकल सामग्री का रखरखाव होता है।

इसके अलावा अस्पताल में प्रसव के लिए महिलाएं पहुंचती हैं और नवजात बच्चों की देखभाल भी होती है।

ऐसे संवेदनशील परिसर में अगर आवारा पशु खुलेआम घूमते नजर आएं, तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

चमोली जिले के थराली स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) से ऐसी ही तस्वीर सामने आई है। अस्पताल परिसर में आवारा पशु खुलेआम घूमते दिखाई दे रहे हैं।

तीन विकासखंडों के मरीज पहुंचते हैं अस्पताल

थराली का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आसपास के तीन विकासखंडों के लोगों के लिए प्रमुख चिकित्सा केंद्र है।

रोजाना बड़ी संख्या में मरीज और उनके तीमारदार इलाज के लिए यहां पहुंचते हैं।

ऐसे में अस्पताल परिसर में पशुओं की आवाजाही केवल अव्यवस्था का मामला नहीं है।

इससे मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल आने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा होती है।

खासकर बच्चों, बुजुर्गों और प्रसव के लिए पहुंचने वाली महिलाओं के बीच आवारा पशुओं की मौजूदगी परेशानी बढ़ा सकती है।

संक्रमण के खतरे को लेकर भी चिंता

अस्पताल परिसर में दवाइयां, चिकित्सा उपकरण और अन्य जरूरी सामग्री मौजूद रहती है।

मरीजों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की आवाजाही भी लगातार होती रहती है।

ऐसे स्थान पर आवारा पशुओं का पहुंचना स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।

पशुओं की मौजूदगी से गंदगी और संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है।

इसलिए अस्पताल परिसर में पशुओं के प्रवेश को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होना जरूरी है।

साथ ही नियमित निगरानी और साफ-सफाई पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

CMO ने मामले को बताया चिंताजनक

अस्पताल परिसर में आवारा पशुओं के घूमने की जानकारी पर चमोली के CMO डॉ. राजीव सिंह पॉल ने इसे गंभीर मामला बताया है।

उन्होंने कहा कि यदि अस्पताल परिसर में आवारा पशु घूम रहे हैं, तो यह बेहद चिंताजनक है।

मामले की जानकारी अस्पताल प्रबंधन से ली जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

अब बड़ा सवाल यही है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में आवारा पशु आखिर प्रवेश कैसे कर रहे हैं।

साथ ही उन्हें रोकने के लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से क्या व्यवस्था की गई है।

मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल की स्वच्छता से जुड़े इस मामले में अब जिम्मेदारी तय करने के साथ प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।

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