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CJP प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

पुलिस कार्रवाई की जांच कर रही कमेटी नहीं बदलेगी

दिल्ली में 20 जुलाई को हुए CJP छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों की जांच जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए बनाई गई पांच सदस्यीय हाई पावर कमेटी में बदलाव करने से इनकार कर दिया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि कमेटी के सदस्यों पर लगाए गए आरोप अभी अटकलों और पहले से बनी धारणाओं पर आधारित हैं।

इसलिए सिर्फ इन आशंकाओं के आधार पर समिति का पुनर्गठन नहीं किया जा सकता।

20 जुलाई के प्रदर्शन में क्या हुआ था?

CJP के नेतृत्व में 20 जुलाई को छात्रों ने दिल्ली में संसद की ओर मार्च निकाला था।

प्रदर्शनकारी NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर अपनी मांगें उठा रहे थे और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी की गई थी।

मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई थी।

पुलिस कार्रवाई को लेकर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए थे।

दूसरी ओर, पुलिसकर्मियों पर भी हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप सामने आए थे।

इन्हीं आरोपों और जवाबी आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हाई पावर एनक्वायरी कमेटी यानी HPEC बनाई थी।

पैलेट गन और महिला प्रदर्शनकारियों के मामले की भी जांच

सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को जांच का दायरा भी स्पष्ट किया है।

कमेटी पैलेट गन के इस्तेमाल, लक्षित हिंसा और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार से जुड़े आरोपों की जांच करेगी।

इसके साथ ही पुलिस और प्रदर्शनकारियों, दोनों की ओर से हुई कथित अत्यधिक हिंसा तथा संपत्ति के नुकसान की भी जांच होगी।

संवेदनशील गवाहों की पहचान रहेगी गुप्त

अदालत ने गवाहों की सुरक्षा को लेकर भी निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि संवेदनशील गवाहों की पहचान गोपनीय रखी जानी चाहिए।

कमेटी के सामने बयान या सबूत देने वाले लोगों की जानकारी सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जाएगी।

इसके लिए एक अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाने का विकल्प भी दिया गया है।

किसकी अध्यक्षता में बनी है कमेटी?

इस हाई पावर कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं।

इसमें पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा भी शामिल हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश शालिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के सेवानिवृत्त डीजीपी एल.आर. बिश्नोई इसके अन्य सदस्य हैं। (Indian Kanoon)

याचिकाकर्ताओं ने उठाया था हितों के टकराव का मुद्दा

कमेटी बदलने की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं ने इसके एक सदस्य को लेकर हितों के टकराव की आशंका जताई थी।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत में इस मुद्दे को उठाया था।

उनका तर्क था कि कमेटी के एक सदस्य की कुछ अधिकारियों से निकटता जांच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है।

सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन दलीलों का विरोध किया।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इन आपत्तियों को कमेटी के पुनर्गठन का पर्याप्त आधार नहीं माना।

अदालत ने कहा कि समिति का गठन सदस्यों के अनुभव, विशेषज्ञता और विविधता को ध्यान में रखकर किया गया है।

प्रदर्शन के बाद शुरू हुई थी न्यायिक जांच

20 जुलाई के प्रदर्शन के बाद पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की भूमिका को लेकर कई आरोप सामने आए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दोनों पक्षों के आरोपों की जांच के लिए स्वतंत्र समिति बनाई।

अदालत ने पहले ही स्पष्ट किया था कि जांच में पुलिस कार्रवाई के साथ प्रदर्शनकारियों की ओर से हुई हिंसा के आरोपों को भी शामिल किया जाएगा।

अब कोर्ट ने समिति को अपना काम जारी रखने का निर्देश दिया है।

https://youtu.be/y9QpImppl2I?si=XHGmOvs0oxr68tMe
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