अब नई बेंच करेगी सुनवाई
उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने पूर्व पीठ की ओर से सुरक्षित रखा गया फैसला जारी नहीं किया है।
न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने मामले को नई पीठ के समक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट की ओर से रजिस्ट्री को आपराधिक पुनरीक्षण याचिका CRLR/344/2025 मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पेश करने को कहा गया है।
इसके बाद मुख्य न्यायाधीश के स्तर से नई पीठ नामित की जाएगी।
नई पीठ ही मामले में आगे की सुनवाई करेगी।
8 सितंबर को बहस पूरी, फैसला था सुरक्षित
मामले में दोनों पक्षों की बहस 8 सितंबर 2026 को पूरी हुई थी। इसके बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
15 सितंबर को अदालत की कार्यवाही में स्पष्ट किया गया कि कुछ अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण
पूर्व पीठ से फैसला सुनाया जाना उचित नहीं होगा।
इसी आधार पर सुरक्षित फैसला जारी करने के बजाय मामले को दूसरी पीठ के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
इसका मतलब यह है कि हाईकोर्ट ने अभी यह फैसला नहीं सुनाया है कि याचिका खारिज हुई या स्वीकार की गई।
नई पीठ के गठन के बाद ही मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया होगी।
11 सितंबर को गणेश जोशी ने किया था दावा
मामले में विवाद की एक अहम कड़ी 11 सितंबर की प्रेस वार्ता से जुड़ी है।
फैसला सुरक्षित होने के तीन दिन बाद मंत्री गणेश जोशी ने मीडिया के सामने दावा किया था कि उनके खिलाफ दाखिल याचिका खारिज हो गई है।
रिपोर्टों के मुताबिक, जोशी ने कहा था कि उन्हें आदेश की जानकारी मिल चुकी है।
कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि उन्होंने आदेश की प्रति अपने मोबाइल फोन पर मिलने की बात कही थी।
हालांकि, उस समय हाईकोर्ट की ओर से मामले का अंतिम फैसला सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया गया था।
अब अदालत ने सुरक्षित फैसले को जारी करने के बजाय केस को नई पीठ के सामने रखने का निर्देश दिया है।
इसलिए मंत्री की ओर से पहले किया गया याचिका खारिज होने का दावा और अदालत की मौजूदा प्रक्रिया चर्चा में है।
क्या है गणेश जोशी पर आय से अधिक संपत्ति का मामला?
देहरादून निवासी आरटीआई कार्यकर्ता और अधिवक्ता विकेश नेगी ने गणेश जोशी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोप लगाए थे।
नेगी ने आरोप लगाया था कि जोशी की घोषित संपत्ति उनकी ज्ञात आय के मुकाबले अधिक है।
इस मामले में उन्होंने गणेश जोशी की 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल संपत्ति संबंधी जानकारी को भी आधार बनाया था।
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, नेगी ने जोशी के 2022 के चुनावी हलफनामे में करीब 9 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित होने का उल्लेख किया था।
यह आरोप याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। इन्हें अदालत की ओर से इस स्तर पर सिद्ध तथ्य नहीं माना गया है।
2025 में निचली अदालत ने खारिज की थी याचिका
इस मामले की शुरुआत देहरादून की विशेष विजिलेंस अदालत से हुई थी।
मार्च 2025 में विशेष विजिलेंस अदालत ने विकेश नेगी की याचिका खारिज कर दी थी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने शिकायत के साथ
आवश्यक हलफनामा दाखिल नहीं किए जाने को भी महत्वपूर्ण आधार माना था।
अदालत ने यह भी कहा था कि राजपत्रित अधिकारी के खिलाफ स्वतंत्र कार्रवाई के लिए
सरकार से पूर्व अनुमति का प्रावधान लागू होता है।
इसके बाद विकेश नेगी ने निचली अदालत के आदेश को नैनीताल हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट में इसी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई चल रही है।
2024 में विजिलेंस और कैबिनेट की भूमिका भी आई थी सामने
इस मामले की पृष्ठभूमि 2024 तक जाती है।
सितंबर 2024 में विजिलेंस ने गणेश जोशी के खिलाफ कार्रवाई के लिए राज्य मंत्रिपरिषद के निर्णय की जरूरत का मुद्दा अदालत के सामने रखा था।
पीटीआई के अनुसार, विजिलेंस ने बताया था कि मामले को 8 जुलाई 2024 को मंत्रिपरिषद के समक्ष भेजा गया था।
विशेष विजिलेंस न्यायाधीश ने अभियोजन की अनुमति से जुड़े निर्णय के लिए कैबिनेट के फैसले का इंतजार करने को कहा था।
बाद में 2025 में विकेश नेगी की ओर से दायर याचिका पर विशेष विजिलेंस अदालत ने अलग आदेश पारित किया।
यही आदेश बाद में हाईकोर्ट में चुनौती का आधार बना।
अब आगे क्या होगा?
अब मामले की फाइल मुख्य न्यायाधीश के समक्ष जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश नई पीठ का गठन करेंगे। नई पीठ के सामने मामले की आगे की सुनवाई होगी।
फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि हाईकोर्ट ने गणेश जोशी को क्लीन चिट दी है या याचिका खारिज कर दी है।
हाईकोर्ट की मौजूदा प्रक्रिया में अभी अंतिम न्यायिक निर्णय सामने नहीं आया है।
नई पीठ ही आगे मामले की सुनवाई और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।















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