बोर्ड भंग करने की मांग
उत्तराखंड की करीब 7000 बीघा सरकारी जमीन से जुड़े प्रस्तावों को लेकर सियासत तेज हो गई है।
उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने मंगलवार को UIIDB कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया।
उक्रांद के मूल निवास भू-कानून प्रकोष्ठ के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने UIIDB को तत्काल भंग करने की मांग उठाई।
साथ ही सरकारी जमीन की नीलामी प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग भी की गई।
7000 बीघा जमीन को लेकर जताया विरोध
उक्रांद का आरोप है कि उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड विभिन्न सरकारी विभागों की
करीब 7000 बीघा जमीन को अपने अधीन लेने की प्रक्रिया में है।
पार्टी का दावा है कि इसके बाद इन जमीनों की नीलामी किए जाने की तैयारी है।
इसी मुद्दे को लेकर कार्यकर्ता UIIDB कार्यालय पहुंचे और मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान लगाए गए बैनर में सरकार की जमीन संबंधी नीतियों पर तीखा विरोध दर्ज किया गया।

‘मूल निवासियों के अधिकारों की अनदेखी’
मूल निवास भू-कानून प्रकोष्ठ के अध्यक्ष लूशुन टोडरिया ने कहा कि सरकारी जमीन को बड़े पूंजीपतियों को देने की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इससे उत्तराखंड की मूल अवधारणा और मूल निवासियों के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
टोडरिया ने कहा कि जमीन और संसाधनों से जुड़े फैसलों में मूल निवासियों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि UIIDB को भंग नहीं किया गया तो उक्रांद प्रदेशभर में आंदोलन करेगा।
उक्रांद नेताओं ने सरकार पर लगाए आरोप
केंद्रीय उपाध्यक्ष शांति प्रसाद भट्ट ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां बड़े कारोबारी हितों के अनुरूप आगे बढ़ रही हैं।
उन्होंने सरकारी जमीन को कम कीमत पर पूंजीपतियों को दिए जाने की आशंका जताते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
केंद्रीय महामंत्री मीनाक्षी घिल्डियाल ने कहा कि सरकार एक तरफ मजबूत भू-कानून लागू करने का दावा करती है।
वहीं दूसरी ओर सरकारी जमीनों से जुड़ी नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात सामने आ रही है।
केंद्रीय संगठन मंत्री प्रकाश भट्ट ने कहा कि हिमालय की जमीन केवल संपत्ति नहीं है।
यह उत्तराखंड की पहचान और राज्य आंदोलन की मूल भावना से जुड़ा विषय है।

प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष राकेश नेगी ने कहा कि जमीन से जुड़े फैसलों में मूल निवासियों के
हितों को प्राथमिकता देने की स्पष्ट व्यवस्था दिखाई नहीं देती।
उन्होंने सरकार की नीतियों को मूल निवासियों के हितों के विपरीत बताया।
महिला प्रकोष्ठ की उपाध्यक्ष संगीता सकलानी बहुगुणा ने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन में जल, जंगल और जमीन का सवाल प्रमुख रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्राकृतिक संसाधनों को निजी हितों के लिए उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि उक्रांद इस मुद्दे को लेकर प्रदेश की जनता के बीच जाएगा।
पार्टी ने UIIDB भंग नहीं होने और जमीन की नीलामी पर रोक नहीं लगने की स्थिति में व्यापक जनआंदोलन की चेतावनी दी है।
प्रदर्शन में प्रकोष्ठ के महामंत्री कपिल रावत, मीडिया प्रभारी दिनेश पंत, पौड़ी के महामंत्री पंकज पोखरियाल,
महानगर महामंत्री अजय सिंह, सुचेता उनियाल, आनंद कोठारी, सुनील मेंदोलिया, कैप्टन धर्मेंद्र असवाल और संदीप रावत सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।















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