अभिषेक रावत
कभी उत्तराखंड राज्य आंदोलन की प्रमुख ताकत रहे उत्तराखंड क्रांति दल की चमोली में सक्रियता फिर बढ़ती दिखाई दे रही है।
राज्य आंदोलनकारी और शिक्षक संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी के उक्रांद में शामिल होने के बाद पार्टी को नई ऊर्जा मिली है।
डिमरी की एंट्री का असर बदरीनाथ के साथ कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र की राजनीति पर भी पड़ने की चर्चा शुरू हो गई है।
कर्णप्रयाग में आशीष नेगी की सक्रियता
कर्णप्रयाग में उक्रांद के युवा चेहरे आशीष नेगी पिछले कई महीनों से लगातार सक्रिय हैं।
वह कर्णप्रयाग और गैरसैंण क्षेत्र के गांवों में जनसंपर्क कर रहे हैं। युवाओं से संवाद के साथ स्थानीय मुद्दों को भी उठा रहे हैं।
पलायन, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर उनकी सक्रियता दिखाई दे रही है।
उक्रांद समर्थकों का मानना है कि इन मुद्दों के जरिए पार्टी को क्षेत्र में दोबारा राजनीतिक जमीन मिल सकती है।
पुराने मुद्दों के सहारे वापसी की कोशिश
उत्तराखंड क्रांति दल लंबे समय से पहाड़ के सवालों को अपनी राजनीति का आधार बनाता रहा है।
स्थायी राजधानी गैरसैंण, पलायन, रोजगार और पहाड़ में बेहतर स्वास्थ्य-शिक्षा व्यवस्था पार्टी के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे हैं।
चमोली में पार्टी की हालिया गतिविधियों ने एक बार फिर इन मुद्दों को राजनीतिक चर्चा में ला दिया है।
क्या त्रिकोणीय मुकाबले की बनेगी स्थिति?
कर्णप्रयाग में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला परंपरागत रूप से चर्चा में रहा है।
अब उक्रांद की सक्रियता के बाद तीसरे राजनीतिक विकल्प को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।
आशीष नेगी की क्षेत्र में सक्रियता और पार्टी के संगठन विस्तार को इसी नजरिए से देखा जा रहा है।
हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कर्णप्रयाग में त्रिकोणीय मुकाबला तय हो गया है।
चुनावी तस्वीर उम्मीदवारों की घोषणा, पार्टी संगठन और जमीनी समर्थन के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल कर्णप्रयाग में उक्रांद की बढ़ती गतिविधियों ने भाजपा और कांग्रेस के बीच होने वाली सियासी चर्चा में एक नया कोण जरूर जोड़ दिया है।
अब नजर इस बात पर है कि आशीष नेगी की क्षेत्र में सक्रियता चुनाव तक किस तरह का राजनीतिक असर पैदा करती है।















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