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रसोई में फिर महंगाई की मार, प्याज 70 रुपये किलो तक

देश में खाने-पीने की चीजों की कीमतों ने एक बार फिर घरेलू बजट की चिंता बढ़ा दी है।

प्याज के दाम लगातार ऊंचे बने हुए हैं। वहीं कई बाजारों में चीनी की कीमत भी ज्यादा दर्ज की जा रही है।

16 सितंबर को प्याज का अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव 53.84 रुपये किलो पहुंच गया।

एक साल पहले यही भाव 27.71 रुपये किलो था। यानी एक साल में प्याज करीब 94 फीसदी महंगा हुआ है।

सरकार 35 रुपये में बेच रही प्याज

महंगाई पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार बफर स्टॉक का प्याज 35 रुपये किलो में बेच रही है।

सरकार ने 24 अगस्त से बफर प्याज की बिक्री शुरू की थी। अब यह अभियान 19 शहरों तक पहुंच चुका है।

NCCF, NAFED और केंद्रीय भंडार के जरिए प्याज उपलब्ध कराया जा रहा है।

इसके अलावा मोबाइल वैन और सड़क परिवहन के जरिए भी आपूर्ति बढ़ाई गई है।

सरकारी बिक्री और खुले बाजार के भाव में अंतर अब भी काफी बड़ा है।

यही वजह है कि आम ग्राहक को बाजार में प्याज खरीदने के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।

चीनी के दाम भी बढ़ा रहे टेंशन

प्याज के साथ चीनी की कीमतें भी उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।

17 सितंबर के उपलब्ध मंडी आंकड़ों में उत्तर प्रदेश में चीनी का औसत भाव करीब 57.40 रुपये किलो रहा।

राजस्थान के जयपुर में भी चीनी का मंडी भाव करीब 55.50 रुपये किलो दर्ज किया गया।

हालांकि ये मंडी भाव हैं और इन्हें देश का औसत खुदरा भाव नहीं माना जा सकता।

उपभोक्ता मामलों का विभाग चीनी समेत जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों की नियमित निगरानी करता है।

सरकार ने चीनी पर भी बढ़ाई निगरानी

चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सितंबर के दूसरे पखवाड़े में 13.50 लाख टन का बिक्री कोटा तय किया गया है।

यह कोटा 587 चीनी मिलों और दो रिफाइनरियों के लिए आवंटित किया गया है।

सरकार ने व्यापारियों और डीलरों के लिए चीनी की स्टॉक सीमा भी घटाई है।

15 सितंबर से 30 नवंबर तक अब अधिकतम 2,000 क्विंटल चीनी रखने की सीमा लागू है।

आम आदमी की जेब पर असर

प्याज और चीनी दोनों रोजमर्रा की रसोई का हिस्सा हैं। ऐसे में कीमतों का ऊंचा स्तर सीधे परिवारों के मासिक खर्च को प्रभावित कर सकता है।

प्याज की कीमतों पर फिलहाल सरकार बफर स्टॉक के जरिए दबाव कम करने की कोशिश कर रही है।

सरकार के मुताबिक नई खरीफ फसल की आवक बढ़ने के बाद बाजार में राहत मिल सकती है।

चीनी के मामले में भी बिक्री कोटा और स्टॉक सीमा के जरिए बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश जारी है।

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