अंकिता की चौथी बरसी पर श्रीनगर में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।
यहां लोगों ने अंकिता को याद करते हुए न्याय की मांग दोहराई।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि चार साल बाद भी अंकिता मामले से जुड़े कई सवाल लोगों के बीच मौजूद हैं।
कर्णप्रयाग सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी कैंडल मार्च और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए।
अलग-अलग संगठनों ने अंकिता के परिवार के प्रति संवेदना जताई और मामले में बचे सवालों का जवाब सामने लाने की मांग की।

इंद्रेश मैखुरी ने VIP एंगल पर सरकार को घेरा
अंकिता की चौथी बरसी पर वरिष्ठ वामपंथी नेता इंद्रेश मैखुरी ने भी VIP एंगल को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि अंकिता के माता-पिता शुरू से दोषियों को कठोर सजा देने की मांग करते रहे हैं।
साथ ही कथित VIP की पहचान और भूमिका की जांच का सवाल भी लगातार उठता रहा है।
मैखुरी ने दावा किया कि अदालत के फैसले में भी कथित VIP के संदर्भ का उल्लेख है।
उनके मुताबिक, जब अदालत के फैसले में इस पहलू का जिक्र है तो संबंधित व्यक्ति की पहचान और भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कथित VIP कौन है और उसकी भूमिका की जांच कहां तक पहुंची है।
मैखुरी ने आरोप लगाया कि VIP एंगल को लगातार कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, पुलिस की ओर से पहले कहा गया है कि जांच में किसी VIP की संलिप्तता सामने नहीं आई।
ऐसे में इस पूरे मामले में अलग-अलग पक्षों के दावों के बीच स्थिति स्पष्ट करने की जिम्मेदारी जांच एजेंसी पर है।

CBI जांच को लेकर भी उठे सवाल
मैखुरी ने सीबीआई जांच की प्रगति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच की मांग पिछले कई वर्षों से की जा रही थी।
उनके अनुसार, मुख्यमंत्री की ओर से परिवार से राय मांगे जाने के बाद अंकिता के माता-पिता ने लिखित रूप से सीबीआई जांच की मांग की थी।
मैखुरी के मुताबिक, परिवार ने जांच सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग भी रखी थी। उन्होंने अनिल जोशी के नाम से दर्ज एफआईआर के आधार पर सीबीआई द्वारा मामला लेने पर भी सवाल उठाए।
मैखुरी ने दावा किया कि सीबीआई ने 2 फरवरी को मामले को अपने हाथ में लिया था। उन्होंने कहा कि 18 सितंबर तक करीब आठ महीने होने के बावजूद जांच की प्रगति सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट नहीं है।
वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि उनकी सरकार की सिफारिश पर सीबीआई जांच कर रही है।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि सीबीआई जांच से मामले से जुड़े तथ्यों की स्थिति और स्पष्ट होगी।

दूसरे महिला अपराध मामलों का भी उठाया मुद्दा
मैखुरी ने बातचीत के दौरान उत्तराखंड में सामने आए दूसरे महिला अपराध मामलों का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा और न्याय के सवाल को केवल अंकिता मामले तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कठुआ कांड के बाद आरोपियों के समर्थन में हुए प्रदर्शनों का उदाहरण दिया।
इसके साथ ही उन्होंने उत्तराखंड के लालकुआं में दुष्कर्म के आरोपी के समर्थन में कथित जुलूस का भी जिक्र किया।
उत्तराखंड में महिला अपराध से जुड़े दूसरे मामलों में भी पुलिस कार्रवाई, जांच और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर अलग-अलग समय पर सवाल उठते रहे हैं।
लालकुआं के मुकेश बोरा प्रकरण में भी दुष्कर्म के आरोपों के बाद राजनीतिक विवाद सामने आया था।
इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था।
मैखुरी ने इन घटनाओं को अंकिता मामले से जोड़ते हुए महिला सुरक्षा और कानून के समान इस्तेमाल का सवाल उठाया।
उन्होंने सरकार पर महिलाओं, दलितों और अल्पसंख्यकों से जुड़े मामलों में गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप भी लगाया।
सरकार पर लगाए राजनीतिक आरोप
मैखुरी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार सामाजिक मुद्दों से ध्यान हटाकर धर्म और जाति के आधार पर विभाजन की राजनीति कर रही है।
उन्होंने कहा कि अंकिता मामला महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की गंभीर परीक्षा है।
उन्होंने सरकार को संवेदनहीन बताते हुए कहा कि अगर इतने चर्चित मामले में भी लंबित सवालों का जवाब नहीं
मिलता तो आम लोगों के मामलों में न्याय की उम्मीद कैसे की जाएगी।
ये सभी आरोप मैखुरी के राजनीतिक बयान हैं। सरकार और भाजपा का पक्ष इस पूरे इंटरव्यू में अलग से दर्ज नहीं है।
इसलिए इन दावों को स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं, बल्कि मैखुरी के आरोप और राजनीतिक टिप्पणी के रूप में देखा जाना चाहिए।
2027 से पहले फिर केंद्र में आया अंकिता का मुद्दा
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अंकिता भंडारी का मुद्दा एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में चर्चा के केंद्र में है।
सामाजिक संगठनों और वाम दलों के साथ अब कांग्रेस भी इस मुद्दे पर सक्रिय दिखाई दे रही है।
मैखुरी ने कहा कि अंकिता का सवाल अब केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है।
उन्होंने सीबीआई की भूमिका को लेकर केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री राज्य स्तर पर सीबीआई जांच की मांग कर सकते थे, लेकिन जांच एजेंसी केंद्र के अधीन है।
मैखुरी ने इसी आधार पर केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व से जवाब मांगने की बात कही।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि अगर
सीबीआई कथित VIP एंगल पर आगे नहीं बढ़ रही है तो केंद्र सरकार को इसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
मैखुरी ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ नारे का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि बेटियों को आखिर किससे बचाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अंकिता का मामला अब पूरे देश में महिला सुरक्षा और न्याय का सवाल बन चुका है।
चार साल बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीन दोषियों को सजा मिल चुकी है।
लेकिन कथित VIP एंगल, सीबीआई जांच की प्रगति और परिवार की बाकी मांगें अब भी सार्वजनिक बहस का हिस्सा हैं।
चौथी बरसी पर प्रदेशभर में उठी आवाज ने इन सवालों को एक बार फिर सामने ला दिया है।















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