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सरोकारों से साक्षात्कार

HNBGU में जल संसाधन और स्प्रिंगशेड प्रबंधन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आज

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में मीठे जल संसाधनों और स्प्रिंगशेड प्रबंधन पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित होगी।

भौगोलिक सोसायटी ऑफ उत्तराखंड (GSUK) के तत्वावधान में होने वाली यह संगोष्ठी 30 सितंबर को भूगोल विभाग, स्कूल ऑफ अर्थ साइंसेज के आतिथ्य में होगी।

संगोष्ठी के संयोजक भूगोल विभाग के प्रो. एमएस पंवार हैं।

कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों से शिक्षाविद, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, विषय विशेषज्ञ और विद्यार्थी शामिल होंगे।

झरनों के संरक्षण पर होगा मंथन

हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक झरने स्थानीय समुदायों के लिए जल, आजीविका और कृषि का प्रमुख आधार हैं। इनके साथ जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन भी जुड़ा है।

जलवायु परिवर्तन, अनियोजित विकास, भूमि उपयोग में बदलाव और वनों पर बढ़ते दबाव से जलस्रोत प्रभावित हो रहे हैं।

ऐसे में झरनों के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर स्प्रिंगशेड प्रबंधन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

GIS और रिमोट सेंसिंग पर भी चर्चा

संगोष्ठी में जलस्रोतों की स्थिति, झरनों के पुनर्जीवन, जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन और भूजल पुनर्भरण जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

इसके अलावा जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और समुदाय आधारित स्प्रिंगशेड प्रबंधन पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।

प्राकृतिक झरनों के वैज्ञानिक अध्ययन, पारंपरिक जल ज्ञान और स्थानीय समुदायों की भूमिका पर भी चर्चा होगी।

GIS और रिमोट सेंसिंग के जरिए जलग्रहण क्षेत्रों के विश्लेषण से जुड़े पहलुओं को भी सामने रखा जाएगा।

आयोजकों के अनुसार, संगोष्ठी का उद्देश्य हिमालयी जल संसाधनों के सतत प्रबंधन को लेकर ज्ञान और अनुभव साझा करना है।

इसके साथ जल संरक्षण, जल पुनर्भरण और समुदाय की भागीदारी पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

https://youtu.be/iBt4bZTkf7E?si=cRvX4whjNmPEF9hn
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