हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के डॉ. आंबेडकर उत्कृष्टता केंद्र की ओर से
विद्यार्थियों के क्षमता निर्माण, व्यक्तित्व विकास और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल, निर्णय लेने की क्षमता और सकारात्मक सोच विकसित करने से जुड़े पहलुओं पर जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह और अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया।
केंद्र के समन्वयक प्रो. एमएम सेमवाल ने स्वागत संबोधन में कार्यशाला के उद्देश्य और विद्यार्थियों के लिए इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण केवल जानकारी हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और व्यवहारिक कौशल को विकसित करने की प्रक्रिया भी है।

कुलपति ने लक्ष्य तय कर तैयारी की दी सलाह
कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने विद्यार्थियों से स्पष्ट लक्ष्य तय कर लगातार प्रयास करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य अकादमिक ज्ञान के साथ अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक सोच विकसित करना भी है।
उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विश्वविद्यालय के पुस्तकालय और उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करने पर जोर दिया।
विद्यार्थियों से उपलब्ध अवसरों का सही इस्तेमाल कर अपनी क्षमता को बेहतर बनाने की अपील की।

विशेषज्ञों ने बताए सफलता के जरूरी पहलू
दून विश्वविद्यालय के प्रो. हर्ष पति डोभाल ने सफलता के लिए निरंतर अध्ययन, आत्मविश्वास और अनुशासन को जरूरी बताया।
उन्होंने विद्यार्थियों से चुनौतियों को सीखने और आगे बढ़ने के अवसर के रूप में लेने की बात कही।
प्रो. डीएस नेगी ने बदलते शैक्षणिक और व्यावसायिक परिवेश के अनुरूप ज्ञान और कौशल विकसित करने पर जोर दिया।
जिला समाज कल्याण अधिकारी पौड़ी रोहित सिंह दुबरिया ने विभाग की विभिन्न योजनाओं और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी।

शिक्षकों और विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम की अध्यक्षता बिरला परिसर निदेशक प्रो. हरिभजन सिंह चौहान ने की। इस दौरान प्रो. महेंद्र बाबू,
प्रो. एमएस नेगी, डॉ. जसपाल सिंह चौहान, डॉ. श्वेता वर्मा, डॉ. वरुण बर्थवाल, डॉ. सुरेंद्र मीणा, डॉ. विनीत मौर्य और डॉ. राम साहू सहित कई शिक्षक मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशीष बहुगुणा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रकाश कुमार सिंह ने दिया।
कार्यशाला को सफल बनाने में डॉ. अरविंद रावत, डॉ. वीर सिंह, डॉ. शैलेंद्र चमोला, डॉ. मुकेश सहाय, गौरव पडियार और गौरव वर्मा ने सहयोग किया।















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