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NEET UG फर्जी सर्टिफिकेट मामले में तीसरी FIR

स्थायी निवास और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र पर केस

उत्तराखंड में MBBS दाखिले से जुड़े फर्जी प्रमाण पत्र मामले में अब तीसरी FIR दर्ज हुई है। इस बार मामला देहरादून के बसंत विहार थाने पहुंचा है।

राजस्व विभाग की शिकायत पर ललित तोमर उर्फ एलिस तोमर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

आरोप है कि उसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दो प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन किया था।

बताए पते पर नहीं मिला आवेदक

राजस्व विभाग की कर्मचारी स्वाति की शिकायत के अनुसार, ललित तोमर ने हरिद्वार-कांवली क्षेत्र के 16 राम विहार का निवासी बताते हुए तहसील सदर में आवेदन किया था।

इनमें स्थायी निवास प्रमाण पत्र और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र शामिल था।

आवेदन के बाद राजस्व विभाग की टीम ने बताए गए पते पर स्थलीय सत्यापन कराया।

सत्यापन के दौरान आवेदक वहां निवासरत नहीं मिला। जांच में आवेदन के साथ लगाए गए दस्तावेजों की सत्यता पर भी सवाल सामने आए।

इसके बाद बसंत विहार थाने में BNS की धारा 318(4), 336(3), 338 और 340(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

पहले दो थानों में दर्ज हो चुके हैं केस

फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए MBBS दाखिले का मामला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के प्रमाण पत्रों की जांच के दौरान सामने आया था।

इसके बाद देहरादून के रायपुर और क्लेमेंटटाउन थानों में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज हुए।

रायपुर केस में तीन छात्राएं नामजद हैं, जबकि क्लेमेंटटाउन मामले में एक छात्रा और उसकी मां आरोपी बनाई गई हैं।

अब बसंत विहार में तीसरी FIR दर्ज होने के बाद तीनों मामलों में नामजद आरोपियों की संख्या छह हो गई है।

एसआईटी कर रही जांच, 12 गिरफ्तार

मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी रायपुर और क्लेमेंटटाउन में दर्ज मुकदमों की जांच कर रही है।

पुलिस के मुताबिक, देहरादून में एसआईटी ने अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।

अन्य जिलों में भी इस मामले में सात गिरफ्तारियां हुई हैं। इस तरह फर्जी प्रमाण पत्र मामले में अब तक कुल 12 लोगों की गिरफ्तारी बताई गई है।

एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल के मुताबिक, तीसरी FIR के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया है।

अलग-अलग तहसीलों से जारी प्रमाण पत्रों और आवेदनों में लगे दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

इसके साथ ही MBBS काउंसलिंग के दौरान जमा रिकॉर्ड का भी मिलान किया जा रहा है।

जांच में यह पता लगाने की कोशिश है कि फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराने और उनके इस्तेमाल में कितने लोग शामिल थे।

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