गर्म पानी में स्नान कर सकेंगे पर्यटक
उत्तराखंड के प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोत अब पर्यटन विकास की नई पहचान बन सकते हैं।
सरकार इन स्रोतों का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के साथ पर्यटन सुविधाएं विकसित करने में भी करना चाहती है।
इसकी शुरुआत पिथौरागढ़ जिले के मदकोट से करने की तैयारी है।
प्रस्तावित योजना के तहत यहां जियोथर्मल पूल बनाए जाएंगे।
पर्यटकों के ठहरने के लिए कॉटेज और अन्य सुविधाएं भी विकसित करने की योजना है।
इससे प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोतों को पर्यटन से जोड़ने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की उम्मीद है।
मदकोट में जियोथर्मल पूल के साथ बनेंगे कॉटेज
पर्यटन विभाग मदकोट में गर्म पानी के प्राकृतिक स्रोत के आसपास पर्यटक सुविधाएं विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है।
इसके तहत पर्यटकों को गर्म पानी में स्नान की सुविधा मिलेगी। महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग स्नान स्थल बनाने की भी योजना है।
पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल के मुताबिक, राज्य में नए पर्यटन स्थल विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इसी क्रम में मदकोट को आधुनिक पर्यटक सुविधाओं से जोड़ने की योजना तैयार की गई है।
उन्होंने बताया कि परियोजना शुरू करने से पहले गर्म पानी की जांच कराई जाएगी।
सुरक्षा संबंधी पहलुओं का भी अध्ययन होगा। इसके लिए वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान की मदद ली जाएगी।
उत्तराखंड में चिह्नित हैं 40 जियोथर्मल स्प्रिंग्स
वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. समीर कुमार तिवारी के अनुसार, उत्तराखंड में 40 सक्रिय जियोथर्मल स्प्रिंग्स चिह्नित किए गए हैं।
राज्य में इनके अलावा भी गर्म पानी के अन्य स्रोत मौजूद हैं, जिनकी पहचान अभी नहीं हुई है।
उन्होंने बताया कि कुमाऊं क्षेत्र में गोरी गंगा के आसपास लगभग 13 किलोमीटर लंबी जियोथर्मल स्प्रिंग बेल्ट मौजूद है।
इस क्षेत्र में करीब 10 गर्म पानी के स्रोत हैं। इनका इस्तेमाल पर्यटन के साथ कृषि, मछली पालन और ग्रीनहाउस जैसी गतिविधियों में भी किया जा सकता है।
डॉ. तिवारी के मुताबिक, जियोथर्मल स्प्रिंग्स का उपयोग जियोथर्मल स्पा, बैल्नियोथेरेपी और एक्वाकल्चर जैसी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
इन स्रोतों का बेहतर इस्तेमाल स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे सकता है।
बिजली से लेकर खेती तक उपयोगी हैं गर्म पानी के स्रोत
जियोथर्मल स्प्रिंग्स का इस्तेमाल केवल पर्यटकों को स्नान की सुविधा देने तक सीमित नहीं है।
इनसे मिलने वाली प्राकृतिक गर्मी का उपयोग घरेलू हीटिंग और ग्रीनहाउस को गर्म रखने में किया जा सकता है।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान घरों, होटलों और धर्मशालाओं को गर्म रखने के लिए भी यह उपयोगी हो सकता है।
इसके अलावा नियंत्रित परिस्थितियों में कृषि और मछली पालन को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
इन स्रोतों के आसपास स्पा, ठहरने की सुविधाएं और अन्य पर्यटन गतिविधियां विकसित होने से होटल,
होमस्टे, खानपान और स्थानीय परिवहन से जुड़े व्यवसायों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
बदरीनाथ के तप्त कुंड का भी दिया उदाहरण
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने जियोथर्मल स्प्रिंग्स के महत्व को समझाते हुए बदरीनाथ धाम के तप्त कुंड का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को तप्त कुंड में स्नान से थकान दूर करने में राहत मिलती है।
उन्होंने बताया कि विदेशों में भी प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोतों का इस्तेमाल स्नान और पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए किया जाता है।
उत्तराखंड में भी ऐसी सुविधाएं विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
योजना सफल हुई तो दूसरे क्षेत्रों में भी बढ़ेंगी सुविधाएं
उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोत पर्यटन और स्थानीय आजीविका के लिए नई संभावनाएं खोल सकते हैं।
हालांकि, इनके विकास से पहले पानी की गुणवत्ता और सुरक्षा का वैज्ञानिक आकलन जरूरी होगा।
मदकोट में प्रस्तावित योजना सफल रहती है, तो राज्य के दूसरे उपयुक्त गर्म पानी के स्रोतों को भी पर्यटन सर्किट से जोड़ने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
इससे प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा मिल सकता है।
















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