24 इंच की पाइपलाइन की मरम्मत पूरी
श्रीनगर में पिछले 11 दिनों से चल रहा पेयजल संकट अब खत्म होने की उम्मीद है।
श्रीकोट क्षेत्र में क्षतिग्रस्त हुई 24 इंच की मुख्य पेयजल पाइपलाइन की मरम्मत पूरी कर ली गई है।
फिलहाल जल संस्थान की टीम पाइपलाइन की टेस्टिंग कर रही है।
अधिकारियों के मुताबिक टेस्टिंग सफल रहने पर 9 अक्टूबर से शहर में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह सुचारु हो सकती है।
भारी बारिश में क्षतिग्रस्त हुई थी मुख्य पाइपलाइन
करीब 11 दिन पहले हुई भारी बारिश के दौरान अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ गया था।
श्रीकोट क्षेत्र में नदी का जलस्तर बढ़ने से एक पुश्ता क्षतिग्रस्त हो गया था।
इसकी चपेट में आने से जल संस्थान की करीब 24 इंच चौड़ी मुख्य पेयजल पाइपलाइन टूट गई थी।
पाइपलाइन टूटने के बाद श्रीनगर शहर की पेयजल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई।
मरम्मत के लिए जल संस्थान को गाजियाबाद से नया पाइप मंगवाना पड़ा। इसके बाद अधिकारियों और कर्मचारियों ने दिन-रात काम कर मरम्मत का कार्य पूरा किया।
जल संस्थान के सहायक अभियंता इंजीनियर अरपित मित्तल ने बताया कि क्षतिग्रस्त लाइन की मरम्मत पूरी हो चुकी है।
फिलहाल पाइपलाइन की टेस्टिंग चल रही है। टेस्टिंग सफल रही तो 9 अक्टूबर से पेयजल आपूर्ति पूरी तरह बहाल कर दी जाएगी।
टैंकरों और वैकल्पिक लाइनों से पहुंचाया गया पानी
पिछले 11 दिनों में श्रीनगर के लोगों को पानी के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ी। श्राद्ध पक्ष के दौरान भी शहर के कई इलाकों में पेयजल संकट बना रहा।
जल संस्थान और नगर निगम ने टैंकरों के जरिए अलग-अलग मोहल्लों में पानी पहुंचाने की व्यवस्था की।
हालांकि शहर की जरूरत के मुकाबले टैंकरों से होने वाली आपूर्ति पर्याप्त नहीं रही।
कई स्थानों पर लोगों को पानी भरने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा। निजी बोरिंग वाले स्थानों पर भी लोगों की भीड़ जुटी।
गुरुद्वारे सहित अन्य स्थानों की बोरिंग व्यवस्था से भी लोगों को राहत मिली।
जल संस्थान ने पुरानी पेयजल लाइनों का भी इस्तेमाल किया।
जिन लाइनों का नियमित उपयोग नहीं हो रहा था, उनसे अलग-अलग मोहल्लों में क्रमवार पानी पहुंचाने का प्रयास किया गया।
श्रीनगर गढ़वाल का पेयजल संकट खत्म होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शहर में एनआईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज और राजकीय पॉलिटेक्निक जैसे प्रमुख संस्थान हैं।
यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र पहुंचते हैं। इसके अलावा कर्मचारी, स्थानीय निवासी, होटल और पीजी संचालक भी नियमित पेयजल आपूर्ति पर निर्भर हैं।
श्रीनगर चारधाम यात्रा मार्ग का प्रमुख पड़ाव भी है। ऐसे में शहर में पेयजल व्यवस्था सामान्य होना स्थानीय आबादी के साथ यात्रियों के लिए भी राहत की बात होगी।
अब सभी की नजर पाइपलाइन की टेस्टिंग पर है। टेस्टिंग सफल रहने के बाद 9 अक्टूबर से शहर में पानी की आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है।
लेखिका बीते ढाई दशक से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय हैं.वर्ष 2015 से रीजनल रिपोर्टर के संपादक के पद पर कार्यरत हैं.














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