उत्तराखंड में 10 सूत्रीय मांगों को लेकर ग्राम प्रधानों का आंदोलन तेज हो गया है।
गुरुवार को प्रदेशभर से पहुंचे ग्राम प्रधानों ने परेड ग्राउंड में सभा के बाद सचिवालय कूच किया।
पुलिस ने सुभाष रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी।
पुलिस और प्रधानों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। इसके बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर धरने पर बैठ गए।
8 अक्टूबर को सरकार ने लिया समिति गठन का फैसला
ग्राम प्रधानों के प्रदर्शन के बाद शासन ने उनकी मांगों की समीक्षा के लिए चार सदस्यीय समिति गठित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री के सचिव शैलेश बगोली की ओर से 8 अक्टूबर को इस संबंध में आदेश जारी किया गया।
समिति में सचिव पंचायती राज को अध्यक्ष, सचिव वित्त और सचिव ग्राम्य विकास को सदस्य तथा निदेशक पंचायती राज को सदस्य संयोजक बनाया गया है।
समिति मांगों का बिंदुवार परीक्षण कर अपनी संस्तुति शासन को देगी।
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, ग्राम प्रधान 28 सितंबर से पंचायती राज निदेशालय में भी आंदोलन कर रहे थे।
ग्राम प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश माहरा ने कहा कि समिति एक सप्ताह के भीतर प्रतिनिधियों से बातचीत करेगी।
प्रधानों ने चेतावनी दी है कि 20 अक्टूबर तक मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

ग्राम प्रधानों की 10 सूत्रीय मांगें
ग्राम प्रधानों ने सरकार के सामने ये 10 प्रमुख मांगें रखी हैं:
- पंचायतों को अधिक अधिकार: ग्राम पंचायतों के अधिकारों में कटौती रोककर उन्हें गांवों के विकास से जुड़े कार्यों में अधिक अधिकार दिए जाएं।
- मानदेय में बढ़ोतरी: ग्राम प्रधानों का मासिक मानदेय 3,500 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये किया जाए।
- न्यूनतम मजदूरी: अकुशल श्रमिकों को 600 रुपये और कुशल श्रमिकों को 800 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दी जाए।
- ऑफलाइन हाजिरी: वीबी-जी राम जी योजना के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में श्रमिकों की उपस्थिति ऑफलाइन दर्ज करने की व्यवस्था हो।
- पंचायत बजट में वृद्धि: जनसंख्या और भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर ग्राम पंचायतों का बजट बढ़ाया जाए।
- 29 विभागों का हस्तांतरण: पंचायती राज अधिनियम के तहत आने वाले 29 विभागों के अधिकार ग्राम पंचायतों को सौंपे जाएं।
- ग्राम प्रधान निधि: विधायक और सांसद निधि की तर्ज पर ग्राम प्रधान निधि बनाई जाए।
- विकास कार्यों की जिम्मेदारी: 10 लाख रुपये तक के स्वीकृत विकास कार्यों के लिए ग्राम पंचायत को कार्यदायी संस्था बनाया जाए।
- स्वास्थ्य और जीवन बीमा: सभी ग्राम प्रधानों को स्वास्थ्य बीमा और जीवन बीमा का लाभ दिया जाए।
- कर व्यवस्था पर स्पष्टता: पंचायतों में लागू नई कर व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट की जाए।















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