शहर को जाम से राहत दिलाने के लिए प्रस्तावित ऋषिकेश बाईपास परियोजना में अब पेड़ों के संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है।
तय एलाइनमेंट के कारण 3,998 पेड़ प्रभावित हो रहे हैं। वन विभाग ने कार्यदायी संस्था को पेड़ों की कटाई के लिए चिह्नित संख्या कम करने के निर्देश दिए हैं।
करीब 13 किलोमीटर लंबे इस बाईपास की जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को सौंपी गई है।
परियोजना के लिए लगभग 47 हेक्टेयर वन भूमि की जरूरत है।
ऋषिकेश में सड़क की सीमित चौड़ाई और वाहनों के बढ़ते दबाव के कारण अक्सर जाम लगता है।
चारधाम यात्रा और सामरिक आवाजाही के लिहाज से भी ऋषिकेश-बदरीनाथ मार्ग महत्वपूर्ण है।
1,204 पेड़ों के प्रत्यारोपण की योजना
परियोजना के लिए चिह्नित 3,998 पेड़ों में से 1,204 का प्रत्यारोपण प्रस्तावित है।
अगस्त में वन भूमि हस्तांतरण नोडल कार्यालय के अधिकारियों ने परियोजना स्थल का निरीक्षण किया था।
इस दौरान प्रभावित पेड़ों का दोबारा आकलन करने और वास्तविक जरूरत के आधार पर कटान की संख्या घटाने के निर्देश दिए गए।
वन विभाग ने जैव विविधता पार्क के शुरुआती हिस्से में करीब 250 मीटर लंबे भूमिगत मार्ग के डिजाइन में भी बदलाव सुझाए हैं।
इसका उद्देश्य वन्यजीवों की आवाजाही और यातायात को सुगम बनाना है।
कार्यदायी संस्था भी ऐसे विकल्पों पर काम कर रही है, जिनसे पेड़ों को कम से कम नुकसान पहुंचे।
मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए 22 करोड़
परियोजना क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए देहरादून और नरेंद्र नगर वन प्रभागों के लिए 22 करोड़ रुपये का प्रावधान बताया गया है।
लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय के अनुसार, बाईपास निर्माण में पेड़ों को कम से कम
नुकसान पहुंचाने के हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
वन विभाग के सहयोग से पेड़ों के प्रत्यारोपण का काम भी किया जाएगा।
अब परियोजना के सामने शहर को जाम से राहत देने के साथ वन क्षेत्र और पेड़ों का संरक्षण सुनिश्चित करने की चुनौती है।
















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