ट्रायल में देरी का दिया हवाला
सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के
पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को सीबीआई के भ्रष्टाचार मामले में जमानत दे दी है।
उन पर कॉलेज में कथित वित्तीय अनियमितताओं और अयोग्य उम्मीदवारों को जगह
दिलाने के लिए मेरिट स्कोर में हेरफेर करने के आरोप हैं।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने 15 अक्टूबर को यह आदेश पारित किया।
कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के 23 फरवरी 2026 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें घोष की जमानत याचिका खारिज की गई थी।
दो साल से अधिक समय से जेल में थे घोष
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने के पीछे जेल में बिताई गई अवधि और मुकदमे की धीमी सुनवाई को अहम आधार माना।
पीठ ने कहा कि घोष दो साल से अधिक समय से जेल में हैं, जबकि मामले में 147 गवाहों में से अब तक केवल सात के बयान दर्ज हुए हैं।
कोर्ट ने आदेश दिया कि घोष को संबंधित ट्रायल कोर्ट की ओर से तय शर्तों पर जमानत दी जाए।
इससे पहले विशेष सीबीआई अदालत ने 7 जनवरी 2025 को और कलकत्ता हाई कोर्ट ने 23 फरवरी 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
वित्तीय गड़बड़ी और मेरिट स्कोर में हेरफेर के आरोप
सीबीआई ने संदीप घोष के खिलाफ विशेष मामला संख्या 1, 2025 में आरोपपत्र दाखिल किया था।
यह मामला सीबीआई की कोलकाता स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में 24 अगस्त 2024 को दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है।
जांच एजेंसी ने घोष पर कॉलेज में कथित वित्तीय अनियमितताओं और मेरिट स्कोर में
हेरफेर कर अयोग्य उम्मीदवारों को प्रवेश दिलाने से जुड़े आरोप लगाए हैं।
मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420, 468, 471 और 120-बी के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है।
मामले में सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।















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