चमोली: चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली के शीतकालीन गद्दीस्थल गोपेश्वर स्थित
गोपीनाथ मंदिर पहुंचने के साथ ही मंदिर परिसर शिवमय हो गया।
सोमवार, 19 अक्टूबर को डोली के पहुंचते ही हर-हर महादेव के जयकारे गूंज उठे।
हजारों श्रद्धालुओं ने डोली के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
भोलेनाथ की उत्सव डोली के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।
शंखध्वनि और जयकारों के बीच मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान रुद्रनाथ के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
17 अक्टूबर को बंद हुए थे धाम के कपाट
उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित रुद्रनाथ धाम के कपाट 17 अक्टूबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे।
कपाट बंद होने से पहले भगवान का अभिषेक, श्रृंगार, विशेष पूजा और रुद्री पाठ किया गया।
इसके बाद उत्सव डोली शीतकालीन प्रवास के लिए रवाना हुई। यात्रा के दौरान डोली ने देवलधार गांव स्थित ज्वाला माता मंदिर में रात्रि विश्राम किया।
छह महीने गोपीनाथ मंदिर में होंगे दर्शन
परंपरा के अनुसार, सर्दियों में अत्यधिक ठंड और बर्फबारी के कारण रुद्रनाथ धाम की यात्रा बंद रहती है।
इस अवधि में भगवान रुद्रनाथ की पूजा-अर्चना गोपेश्वर स्थित ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर में की जाती है।
19 अक्टूबर को उत्सव डोली के यहां पहुंचने के बाद विशेष पूजा-अर्चना के साथ भगवान को शीतकालीन गद्दीस्थल पर विराजमान किया गया।
अब अगले छह महीने तक श्रद्धालु गोपीनाथ मंदिर में भगवान रुद्रनाथ के दर्शन कर सकेंगे।
धाम के कपाट बंद होने के साथ ही शीतकालीन पूजा की परंपरा शुरू हो गई है।
गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में अब श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहेगा।















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