23 नवंबर से श्रीनगर के कमलेश्वर महादेव मंदिर में संतान कामना के लिए रातभर जलता दीपक हाथ में लेकर खड़े रहते हैं दंपती
उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल बैकुंठ चतुर्दशी मेला इस वर्ष 23 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा।
श्रीनगर गढ़वाल के सिद्धपीठ श्री कमलेश्वर महादेव मंदिर में इस अवसर पर होने वाले
पारंपरिक खड़ा दीया अनुष्ठान के लिए श्रद्धालुओं का पंजीकरण शुरू हो गया है।
संतान कामना के लिए रातभर हाथ में रखते हैं जलता दीपक
कमलेश्वर महादेव मंदिर में बैकुंठ चतुर्दशी पर खड़ा दीया अनुष्ठान की सदियों पुरानी परंपरा चली आ रही है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, संतान की कामना रखने वाले दंपती इस अनुष्ठान में शामिल होकर भगवान शिव की आराधना करते हैं।
परंपरा के तहत महिलाएं रातभर हाथ में जलता हुआ दीपक लेकर खड़ी रहती हैं और भगवान कमलेश्वर से संतान सुख की प्रार्थना करती हैं।
अनुष्ठान के दौरान मंदिर में पूजा-अर्चना और धार्मिक विधियां संपन्न कराई जाती हैं। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना से मनोकामना पूरी होती है।
देश के साथ विदेश से भी पहुंचते हैं दंपती
कमलेश्वर महादेव मंदिर का खड़ा दीया अनुष्ठान श्रीनगर की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हर साल बैकुंठ चतुर्दशी पर संतान की कामना लेकर विभिन्न राज्यों से दंपती यहां पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इस बार पंजीकरण प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई है,
ताकि अनुष्ठान में शामिल होने वाले दंपतियों को समय पर जानकारी और व्यवस्था मिल सके।
मोबाइल नंबर पर संपर्क कर करा सकते हैं पंजीकरण
खड़ा दीया पूजा में शामिल होने के इच्छुक श्रद्धालु मंदिर प्रशासन के मोबाइल नंबर 9412324526 और 7895472034 पर संपर्क कर सकते हैं।
पंजीकरण के लिए आवश्यक व्यक्तिगत विवरण उपलब्ध कराने होंगे।
श्रद्धालुओं को सलाह है कि स्लॉट और अनुष्ठान से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए मंदिर प्रशासन से सीधे संपर्क करें।
बैकुंठ चतुर्दशी का आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है।
श्रीनगर में इस अवसर पर धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी होती हैं।
कमलेश्वर महादेव मंदिर में होने वाला खड़ा दीया अनुष्ठान इस पर्व को विशिष्ट पहचान देता है और हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को श्रीनगर खींच लाता है।















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