टोंस नदी पर प्रस्तावित किशाऊ बांध परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है।
उत्तराखंड और हिमाचल की सीमा से लगे क्वानू क्षेत्र में सैकड़ों ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया।
हाथों में तख्तियां लेकर पहुंचे महिला, पुरुषों और बुजुर्गों ने नारेबाजी करते हुए अपनी पुश्तैनी जमीन,
मकान और खेत-खलिहान बचाने की मांग उठाई।
किशाऊ बांध संघर्ष समिति मैलोत-शम्भर-क्वानू के बैनर तले हुए प्रदर्शन में ग्रामीणों ने साफ कहा कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं,
लेकिन विकास की कीमत पर अपने गांव और आजीविका नहीं खो सकते।
उनकी मांग है कि बांध को मौजूदा प्रस्तावित स्थल से 10 से 15 किलोमीटर आगे मीनस की तरफ शिफ्ट किया जाए।

तीन फसल देने वाली जमीन डूबने की आशंका
ग्रामीणों का कहना है कि मौजूदा सर्वे के मुताबिक परियोजना से क्वानू क्षेत्र की उपजाऊ कृषि भूमि और कई राजस्व गांव प्रभावित होंगे।
जिस जमीन पर साल में तीन फसलें पैदा होती हैं, उसके जलमग्न होने की आशंका है।
इससे सैकड़ों परिवारों के सामने विस्थापन और आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी चिंता जताई कि बांध निर्माण से क्षेत्र के जल, जंगल और जमीन के साथ प्राकृतिक संतुलन प्रभावित होगा।
उनका आरोप है कि स्थानीय लोगों की सहमति और उचित मुआवजे को लेकर स्थिति स्पष्ट किए बिना परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।
सीएम के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन की सूचना पर चकराता के एसडीएम प्रेम लाल मौके पर पहुंचे।
ग्रामीणों ने उनके माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले एक साल से विभिन्न स्तरों पर अपनी मांग उठा रहे हैं।
मुख्य सचिव और जिलाधिकारी को भी ज्ञापन दिए जा चुके हैं। चकराता विधायक प्रीतम सिंह ने भी इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया है।
एसडीएम प्रेम लाल ने बताया कि ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया
और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा है। इसे जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
















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