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हिमालय में मिला दुर्लभ कैंसर रोधी चागा मशरूम

100 साल पुराने भोजपत्र पर उगता, डॉ. विजय भट्ट ने की पहचान

उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में शोधकर्ताओं के लिए प्रकृति का अनमोल औषधीय खजाना मिला है।

जड़ी-बूटी शोध संस्थान (मंडल) से सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विजय भट्ट ने धारचूला

और नीति घाटी के दुर्गम इलाकों में दुर्लभ चागा मशरूम (Chaga Mushroom) की पहचान की है।

चागा मशरूम की खासियत

  • यह मशरूम केवल 100 साल से अधिक पुराने भोजपत्र के पेड़ों के तनों पर उगता है।
  • दिखने में यह भूरा-काला, जले हुए कोयले या मधुमक्खी के छत्ते जैसा लगता है।
  • यह कैंसर जैसी घातक बीमारियों से लड़ने में सहायक पाया गया है।
  • इसमें विटामिन-डी2, पॉलीसैकेराइड्स और मिनरल्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
  • यह इम्यून बूस्टर, एंटीऑक्सीडेंट, और डायबिटीज नियंत्रक के रूप में उपयोगी है।

वैज्ञानिक और आर्थिक महत्व

डॉ. भट्ट के अनुसार, चागा मशरूम (Chaga Mushroom) को सुखाकर हर्बल चाय के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

इस मशरूम की अंतरराष्ट्रीय मांग बहुत अधिक है,

और साइबेरिया व रूस से आयातित चागा 25–30 हजार रुपये प्रति किलो बिकता है।

संरक्षण और वैज्ञानिक दोहन से स्थानीय ग्रामीणों को आर्थिक लाभ भी मिल सकता है।

उपयोग और असर

  • कैंसर पीड़ितों और लीवर की बीमारी वाले मरीजों ने इसे अत्यधिक प्रभावी बताया।
  • शुगर नियंत्रक और डिटॉक्सिफिकेशन में सहायक।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर।
https://regionalreporter.in/the-forest-fires-in-the-valley-of-flowers-are-raging/
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