पर्वतों की ऊंचाई, कम ऑक्सीजन और दुर्गम रास्ते। आदि कैलाश में धावकों का इम्तिहान इस बार और कठिन होने वाला है।
आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0 में दौड़ 60 से बढ़ाकर 70 किलोमीटर कर दी गई है।
छियालेख होते हुए गुंजी तक पहुंचने वाले इस नए रूट पर देशभर के धावक दमखम दिखाएंगे।
26 राज्यों के 1100 धावक, पंजीकरण बंद
सीमांत पिथौरागढ़ में होने वाली इस हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा मैराथन को लेकर उत्साह का अंदाजा
इसी बात से लगाया जा सकता है कि 26 राज्यों के करीब 1,100 प्रतिभागी पंजीकरण करा चुके हैं।
पिछले साल पहली बार आयोजित दौड़ में करीब 750 धावक शामिल हुए थे।
हालांकि, क्षेत्र की सीमित व्यवस्थाओं और पर्यावरणीय परिस्थितियों को देखते हुए पंजीकरण बंद कर दिए गए हैं।
इस बार आयोजन 23 से 26 अक्टूबर तक चलेगा। 23 अक्टूबर की शाम गुंजी में इसका उद्घाटन होगा।
10 किलोमीटर ज्यादा दौड़, पहाड़ भी लेंगे परीक्षा
पिछले साल आदि कैलाश से कालापानी होते हुए गुंजी तक 60 किलोमीटर की दौड़ आयोजित की गई थी।
इस बार छियालेख के रास्ते रूट तय किया गया है। दूरी बढ़ने के साथ धावकों के सामने ऊंचाई और दुर्गम पहाड़ी रास्तों की चुनौती भी होगी।
करीब 4,500 मीटर की ऊंचाई पर दौड़ना सामान्य मैराथन से बिल्कुल अलग अनुभव है।
यहां कम ऑक्सीजन के बीच शरीर की क्षमता, सहनशक्ति और मानसिक मजबूती की भी परीक्षा होगी।
मैराथन के बहाने पर्यटन और रोजगार को रफ्तार
आदि कैलाश और ओम पर्वत क्षेत्र में इस आयोजन को केवल खेल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रखा जा रहा।
इसे सीमांत क्षेत्र में पर्यटन बढ़ाने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने की पहल के तौर पर भी देखा जा रहा है।
पिछले साल करीब 1,000 लोगों के ठहरने की व्यवस्था थी, जिसे अब बढ़ाकर लगभग 1,200 लोगों तक किया गया है।
होमस्टे जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिलने की उम्मीद है।
पर्यटकों के साथ पर्यावरण की चिंता भी
पर्यटन गतिविधियां बढ़ने के साथ क्षेत्र की संवेदनशील पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखना भी चुनौती है।
इसके लिए कचरा प्रबंधन की अलग टीम तैनात की जाएगी। टीम निर्धारित रूट से कचरा एकत्र कर धारचूला नगर पालिका क्षेत्र तक पहुंचाएगी।
पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के मुताबिक, क्षेत्र की वहन क्षमता और पर्यावरणीय परिस्थितियों को देखते हुए पंजीकरण रोकने का फैसला लिया गया है।
आयोजन को व्यवस्थित रखने के साथ पर्यटन की संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।















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