3 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, ब्रह्मपुत्र और सहायक नदियां उफान पर, 551 गांव जलमग्न; 71 राहत शिविरों में हजारों लोग शरण लेने को मजबूर
असम में इस बार मानसून ने भारी तबाही मचाई है।
ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के उफान पर होने से राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के सरकारी बुलेटिन के मुताबिक, इस साल बाढ़ और बारिश से जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 78 हो गई है।
शिवसागर और गोलाघाट जिलों में तीन और मौतों की पुष्टि के बाद हालात की गंभीरता और बढ़ गई है।
राज्य के सात जिलों में 3 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
551 गांव पानी में डूबे, 21 हजार हेक्टेयर फसल बर्बाद
बाढ़ से प्रभावित प्रमुख जिलों में शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, बिस्वनाथ और कामरूप मेट्रोपॉलिटन शामिल हैं।
इन जिलों के 21 राजस्व चक्र और 551 गांव बाढ़ की चपेट में हैं।
वहीं, 21 हजार हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि पर खड़ी फसलें पानी में डूबकर बर्बाद हो गई हैं।
चराइदेव जिले में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है, जहां 1.37 लाख से अधिक लोग प्रभावित बताए गए हैं।
शिवसागर में करीब 84 हजार और जोरहाट में लगभग 50 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
71 राहत शिविरों में हजारों लोगों ने ली शरण
बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए प्रशासन की ओर से राहत और बचाव अभियान जारी है।
राज्यभर में 71 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां 16 हजार से ज्यादा विस्थापित लोग शरण लिए हुए हैं।
इसके अलावा 30 राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीमें और पशु चिकित्सा दल भी प्रभावित इलाकों में तैनात हैं।
बाढ़ का असर पशुधन पर भी पड़ा है। हजारों पशु बाढ़ के पानी की चपेट में आए हैं
और बड़ी संख्या में मवेशी प्रभावित हुए हैं।
गुवाहाटी में भी शहरी बाढ़ का संकट
बाढ़ का असर केवल ग्रामीण और नदी किनारे के इलाकों तक सीमित नहीं है।
राजधानी गुवाहाटी के कई हिस्सों में भी अर्बन फ्लड की स्थिति बनी हुई है।
पदुमबारी, बोरागांव, लचित नगर, जू रोड, रुकमिणीगांव, अनिल नगर, नवीन नगर, सातगांव और बेहराबारी समेत कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई है।
कई जगहों पर सड़कें बंद हैं और घरों में सिल्ट जमा होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
सेना ने संभाला मोर्चा
बाढ़ के बीच सेना भी राहत एवं बचाव अभियानों में नागरिक प्रशासन की मदद कर रही है।
थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने पूर्वी थिएटर के दौरे के दौरान बाढ़ राहत अभियानों की उच्चस्तरीय समीक्षा की और राहत कार्यों में जुटे जवानों की तैयारियों का जायजा लिया।
केंद्र और राज्य सरकार की ओर से भी प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।
बाढ़ प्रभावितों के कर्ज और ऋण संबंधी समस्याओं को लेकर बैंकों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी की जा रही है।
30 जुलाई से फिर भारी बारिश का अलर्ट
बाढ़ से जूझ रहे असम के लिए मौसम विभाग ने एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली चेतावनी जारी की है।
30 जुलाई से 1 अगस्त के बीच असम, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।
तिनसुकिया के साथ नगालैंड के मोन, मोकोकचुंग और वोखा जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
इन इलाकों में भारी बारिश का असर असम के चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जैसे जिलों पर भी पड़ सकता है।
प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, जोखिम वाले इलाकों से दूर रहने और मौसम
एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है।















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