शहर सजा सांस्कृतिक रंगों में
12 से 22 जनवरी तक प्रभावी रहेगा यातायात प्लान, बिना पास शहर में प्रवेश वर्जित
उत्तरायणी मेला सरयू-गोमती संगम और बागनाथ मंदिर के समीप आयोजित होता है।
यह कुमाऊं क्षेत्र का सबसे बड़ा सांस्कृतिक मेला है और कुली बेगार प्रथा के अंत का ऐतिहासिक प्रतीक भी माना जाता है।
14 जनवरी को मेले का भव्य उद्घाटन होगा। इस दिन केदारेश्वर मैदान से मुख्य मंच भराड़ी तक भव्य झांकी निकाली जाएगी।
4 जनवरी की शाम सरयू आरती के बाद मुख्य मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
उत्तराखंड के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्व उत्तरायणी मेला 2026 को
सकुशल और व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए बागेश्वर पुलिस व जिला प्रशासन ने
नगर क्षेत्र के लिए विस्तृत ट्रैफिक एवं डायवर्जन प्लान जारी कर दिया है।
यह योजना 12 जनवरी 2026 से 22 जनवरी 2026 तक प्रभावी रहेगी।
मेले के दौरान भारी भीड़ और वाहनों के दबाव को देखते हुए शहर क्षेत्र में
निजी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केवल पासधारी आवश्यक सेवाओं के वाहनों को ही नगर क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।
शहर में निजी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित
पुलिस प्रशासन के अनुसार—
- बागेश्वर नगर क्षेत्र में भारी वाहन, टैक्सी, निजी दोपहिया व चारपहिया वाहनों का प्रवेश पूर्णतः वर्जित रहेगा
- दूध, गैस, सब्जी, खाद्यान्न जैसे अत्यावश्यक सेवाओं के वाहन पास के साथ ही प्रवेश कर सकेंगे
- मेला क्षेत्र में केवल पास प्राप्त वाहनों को ही आवागमन की अनुमति होगी
पार्किंग और टैक्सी व्यवस्था
चारपहिया वाहन पार्किंग
- मेले में आने वाले सभी मेलार्थियों के चारपहिया वाहन
- डिग्री कॉलेज ग्राउंड में पार्क किए जाएंगे
टैक्सी स्टैंड (रूट अनुसार)
- भराड़ी मार्ग: डिग्री कॉलेज ग्राउंड
- ताकुला रोड: TVS शोरूम के सामने
- गरुड़ रोड: द्यांगड बाईपास
- कांडा रोड: भागीरथी बाईपास के पीछे
- नदीगांव रोड: मिलन आइसक्रीम फैक्ट्री के पीछे
टैक्सी वाहनों का मेला क्षेत्र की ओर प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
बस और दोपहिया पार्किंग व्यवस्था
बस स्टैंड
- गरुड़ बैरियर के पीछे (निर्माणाधीन पार्किंग)
दोपहिया पार्किंग
- बस स्टेशन
- मीट मार्केट, कांडा रोड
- भराड़ी स्टैंड
शहर में लगाए गए प्रमुख बैरियर
- डिग्री कॉलेज तिराहा
- गरुड़ टैक्सी स्टैंड
- आरे बाईपास
- ताकुला बैरियर
- कांडा (भागीरथी तिराहा)
- द्यांगड बैरियर
बिना पास इन बैरियरों से आगे जाना सख्त मना रहेगा।
सांस्कृतिक रंगों में सजा बागेश्वर
उत्तरायणी मेले से पहले बागेश्वर नगर को एक ओपन आर्ट गैलरी का रूप दिया जा रहा है।
नगर की प्रमुख दीवारों पर कुमाऊं की लोकसंस्कृति, नृत्य, देवी-देवता,
छोलिया नृत्य, ढोल-दमाऊ और पहाड़ी जीवनशैली को दर्शाती वॉल पेंटिंग्स बनाई जा रही हैं।
हर्ष आर्ट गैलरी की छात्रा गायत्री पांडे के अनुसार,
- सरयू घाट
- नुमाइश मैदान
- बागनाथ मंदिर परिसर
- प्रमुख शहर मार्ग
इन सभी स्थानों को विशेष रूप से चयनित किया गया है।
स्थानीय कलाकारों को मिला मंच
नगर पालिका और जिला प्रशासन की देखरेख में चल रहे इस सौंदर्यीकरण अभियान में
स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता दी जा रही है।
कलाकारों का कहना है कि उनका उद्देश्य नई पीढ़ी को कुमाऊं की
परंपराओं से जोड़ना और लोकसंस्कृति का संरक्षण करना है।
उत्तरायणी मेला: स्थान, तिथियां और महत्व
मुख्य तिथियां (2026)
- 13 जनवरी: मेला प्रारंभ, सरयू-गोमती संगम पर स्नान
- 14 जनवरी (मकर संक्रांति): मुख्य मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम
- 15 जनवरी: खेलकूद प्रतियोगिताएं और स्टार नाइट
- 16 जनवरी: दंगल प्रतियोगिता
- 17 जनवरी: सांस्कृतिक कार्यक्रम व समापन

















Leave a Reply