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उपनल कर्मियों को बड़ी राहत: समान कार्य–समान वेतन पर कैबिनेट का अहम फैसला

पहले चरण में 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वालों को मिलेगा लाभ

विभागों से होगा सीधा अनुबंध

उत्तराखंड सरकार ने वर्षों से उपनल के माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मियों

की एक प्रमुख और लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

कैबिनेट के इस फैसले से तत्काल तौर पर 7 से 8 हजार उपनल कर्मियों को राहत मिलेगी,

जबकि आने वाले समय में इसका लाभ बाद में भर्ती होने वाले कर्मचारियों को भी मिलेगा।

सबसे अहम निर्णय यह है कि अब ये कार्मिक उपनल के माध्यम से नहीं,

बल्कि सीधे संबंधित विभागों के साथ अनुबंध कर कार्य करेंगे, जिससे उनकी सेवा शर्तों में महत्वपूर्ण सुधार होगा।

समान कार्य–समान वेतन पर चरणबद्ध निर्णय

कैबिनेट ने यह भी स्पष्ट किया है कि शेष बचे उपनल कर्मियों को समान कार्य, समान वेतन

दिए जाने के संबंध में चरणबद्ध तरीके से निर्णय लिया जाएगा।

पहले चरण में वर्ष 2025 तक 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कर्मियों को

समान पद के अनुरूप बेसिक वेतन देने का निर्णय लिया गया है।

सरकार का कहना है कि भविष्य में शेष उपनल कर्मियों को भी इस दायरे में लाया जाएगा, ताकि अधिकतम कर्मचारियों को इसका लाभ मिल सके।

प्रदेश में 20 हजार से अधिक उपनल कर्मी तैनात

वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न विभागों में 20 हजार से अधिक उपनल कर्मी सेवाएं दे रहे हैं।

ये कर्मी लंबे समय से समान कार्य के बावजूद समान वेतन न मिलने को लेकर आंदोलनरत रहे हैं।

पूर्ववर्ती सरकारों ने समय-समय पर मानदेय में वृद्धि जरूर की, लेकिन वह अपेक्षाकृत कम रही।

स्थिति यह रही कि कई विभागों में होमगार्ड और पीआरडी जवानों का मानदेय उपनल कर्मियों से अधिक हो गया।

हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद तेज हुई प्रक्रिया

विधिक अड़चनों के चलते मामला लंबे समय तक लटका रहा,

जिसके बाद उपनल कर्मियों ने उत्तराखंड हाईकोर्ट की शरण ली।

हाईकोर्ट के निर्णय के क्रम में राज्य सरकार ने समान पद–समान वेतन के लिए कैबिनेट की उप समिति का

गठन किया। समिति ने अपनी बैठकों में उपनल कर्मियों का पक्ष भी सुना।

पिछली कैबिनेट बैठक में भी यह विषय उठा था, जिसमें 12 वर्ष की सेवा पूरी करने वालों को समान वेतन देने पर चर्चा हुई थी।

गुरुवार की कैबिनेट बैठक में बड़ा निर्णय

गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह प्रकरण एक बार फिर रखा गया।

विस्तृत विचार-विमर्श के बाद यह तय किया गया कि अधिक से अधिक उपनल कर्मियों

को लाभ देने के लिए चरणबद्ध मॉडल अपनाया जाए।

इस निर्णय के तहत अब उपनल कर्मी विभागीय कार्मिकों की तरह सीधे अनुबंध पर कार्य करेंगे,

जिससे उनकी नौकरी की स्थिरता और सम्मान दोनों बढ़ेंगे।

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