रीजनल रिपोर्टर

सरोकारों से साक्षात्कार

मदमहेश्वर घाटी में जाख राजा मेले का भव्य आयोजन

मखमली बुग्यालों में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

गडगू गांव से मखमली बुग्यालों तक भक्तिमय रहा वातावरण, क्षेत्र की खुशहाली व विश्व समृद्धि की कामना

मदमहेश्वर घाटी की सीमांत ग्राम पंचायत गडगू से लगभग तीन किलोमीटर दूर

सुरम्य मखमली बुग्यालों में एक दिवसीय जाख राजा मेले का भव्य आयोजन किया गया।

इस धार्मिक आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और क्षेत्र की खुशहाली व विश्व समृद्धि की कामना की।

दिनभर चले मेले से गडगू गांव से लेकर मखमली बुग्यालों तक का संपूर्ण भूभाग भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।

ब्रह्म बेला में पूजन, डोली का भव्य श्रृंगार

रविवार को ब्रह्म बेला पर विद्वान आचार्य शिव प्रसाद सेमवाल और अखिलेश सेमवाल ने गडगू गांव में

भगवान मदमहेश्वर और जाख राजा मंदिर में पंचांग पूजन संपन्न कराया।

इस दौरान तैंतीस कोटि देवी–देवताओं का आवाहन कर आरती उतारी गई।

ग्रामीणों ने जाख राजा की डोली का भव्य श्रृंगार कर पुष्प, अक्षत और वस्त्र अर्पित किए।

निशानों, वाद्य यंत्रों और जागरों के साथ निकली डोली

सुबह ठीक नौ बजे जाख राजा की डोली अनेक देवी–देवताओं के निशानों, स्थानीय वाद्य यंत्रों की

मधुर धुनों और महिलाओं के मांगलिक जागरों के साथ मखमली बुग्यालों की ओर रवाना हुई।

डोली ने गडगू गांव स्थित मुख्य मंदिर की तीन परिक्रमा की और खेत–खलिहानों में नृत्य करते हुए ग्रामीणों को आशीर्वाद दिया।

परंपरानुसार गंगा व तीर्थ स्नान

गडगू गांव से लेकर मखमली बुग्यालों तक जाख राजा की डोली ने प्राकृतिक जल स्रोतों

और विसुणी नदी में परंपरानुसार गंगा एवं तीर्थ स्नान किया।

बुग्यालों में पहुंचते ही सैकड़ों श्रद्धालुओं की जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। विद्वान आचार्यों ने पंचमुखी आरती से डोली की अगुवाई की।

भोग अर्पण और सामूहिक भोज

दोपहर बाद ग्रामीणों ने जाख राजा को अनेक प्रकार के पारंपरिक व्यंजन अर्पित किए

और क्षेत्र की समृद्धि की कामना की। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं के लिए सामूहिक भोज का आयोजन किया गया।

भोज उपरांत जाख राजा की डोली पुनः अपनी तपस्थली गडगू गांव के लिए रवाना हुई

और खेत–खलिहानों में नृत्य करते हुए भक्तों को आशीर्वाद देकर मंदिर में विराजमान हुई।

परंपरा युगों पुरानी

पूर्व जिला पंचायत सदस्य विनोद राणा ने बताया कि मखमली बुग्यालों में प्रति वर्ष माघ

महीने की पंचमी को जाख राजा मेले का आयोजन होता है और सामूहिक भोज की परंपरा युगों पुरानी है।

वहीं लवीश राणा ने कहा कि एक दिवसीय जाख मेले में मदमहेश्वर घाटी के सभी गांवों

के लोग बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं और जाख राजा के दरबार में हर मनोकामना पूर्ण होती है।

ग्रामीण गणेश सेमवाल ने भी जाख मेले की परंपरा को प्राचीन और आस्था से जुड़ी बताया।

https://regionalreporter.in/dgca-imposes-a-fine-of-rs-22-crore-on-indigo/
https://youtu.be/Lp1q2miRn8U?si=gBXZ0V1SPNopovYY
लक्ष्मण सिंह नेगी
+ posts

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *