क्या डिग्री से कीमती हो गई है जान
भारत के कॉलेजों में बढ़ता मानसिक स्वास्थ्य संकट, सुप्रीम कोर्ट ने संस्थानों को किया जवाबदेह
भारत में छात्र मानसिक स्वास्थ्य अब एक बड़ा संकट बन चुका है।
2025 की रिपोर्ट बताती है कि 70% से अधिक कॉलेज छात्र मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं।
यह केवल पढ़ाई का दबाव नहीं है।
प्लेसमेंट की चिंता, सोशल मीडिया तुलना और पारिवारिक अपेक्षाएं स्थिति को और गंभीर बना रही हैं।
यही वजह है कि अब इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है।
2025 रिपोर्ट: डराने वाले आंकड़े
30 विश्वविद्यालयों में हुए एक सर्वे (2025) में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
- 70.3% छात्र अत्यधिक मानसिक संकट में
- 69.9% छात्र गंभीर Anxiety से प्रभावित
- 59.9% छात्र Depression के लक्षणों से जूझ रहे
- 37.2% मेडिकल छात्रों ने आत्महत्या के विचार स्वीकार किए
स्पष्ट है कि Campus Crisis India 2025 एक वास्तविक समस्या है।
क्यों बढ़ रहा है छात्र मानसिक तनाव
1. प्लेसमेंट और AI का डर
- आज नौकरी की अनिश्चितता बढ़ गई है।
- AI के कारण छात्रों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है।
2. परिवार का दबाव
- कई छात्र अपने घर में पहले ग्रेजुएट होते हैं। इसलिए उन पर आर्थिक जिम्मेदारी ज्यादा होती है।
3. सोशल मीडिया तुलना
- दूसरों की “सफल जिंदगी” देखकर छात्र खुद को कमतर समझते हैं। इसके कारण आत्मविश्वास गिरता है।
4. मदद मांगने में झिझक
- मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अभी भी समाज में कलंक है। इसलिए छात्र काउंसलर के पास जाने से बचते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
जुलाई 2025 में Supreme Court of India ने बड़ा बयान दिया। कोर्ट ने कहा कि छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों की कानूनी जिम्मेदारी है।
अब कॉलेजों को अपनी वार्षिक रिपोर्ट में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कदमों का उल्लेख करना होगा।
यह फैसला Campus Crisis India 2025 पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
समाधान: क्या बदलाव जरूरी
1. कैंपस में काउंसलर अनिवार्य
हर 100 छात्रों पर एक प्रोफेशनल काउंसलर होना चाहिए।
2. 24/7 हेल्पलाइन
कॉलेजों में हेल्पलाइन नंबर प्रमुखता से दिखने चाहिए।
जैसे: Tele-MANAS – 14416
3. Mental Health Day
छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य अवकाश मिलना चाहिए।
4. हॉस्टल सुरक्षा उपाय
Tamper-proof पंखे और सुरक्षा जाली जरूरी हैं।
क्या ‘डिग्री’ से कीमती हो गई है जान
अगर 70% छात्र मानसिक संकट में हैं, तो यह केवल शिक्षा का मुद्दा नहीं है। यह देश के भविष्य का सवाल है।
इसलिए Campus Crisis India 2025 को गंभीरता से लेना होगा।
अब समय है कि शिक्षा प्रणाली में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए।
















Leave a Reply