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देहरादून SIR : एलिवेटेड रोड और मजदूरों के अधिकारों पर उठी आवाज

जनसभा में चार प्रमुख मांगें

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मजदूरों के अधिकारों, मतदाता सूची और मलिन बस्तियों से जुड़े मुद्दों को लेकर जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है।

इसी अभियान के तहत 13 अक्टूबर को कैनाल रोड स्थित हैप्पी एन्क्लेव बस्ती में जनसभा आयोजित की गई।

इसमें स्थानीय लोगों ने SIR, प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना और मजदूरों व बस्ती के निवासियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए।

सभा में विभिन्न मांगों के समर्थन में बैनरों पर हस्ताक्षर कर अपना समर्थन दर्ज कराया गया।

जनसभा में वक्ताओं ने कहा कि आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन और सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

अभियान के दौरान मतदाता सूची में पुराने नामों को बहाल करने, निर्माण मजदूरों को

सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने, मलिन बस्ती अधिनियम लागू करने और प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना रद्द करने की मांग की गई।

2025 की मतदाता सूची बहाल करने की मांग

जनसभा में SIR को लेकर भी विरोध जताया गया। स्थानीय लोगों ने मांग की कि वर्ष 2025 की मतदाता सूची बहाल की जाए।

उनका कहना था कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में लोगों के अधिकारों और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

अभियान के दौरान इस मांग को शामिल करते हुए बैनर तैयार किए गए, जिन पर लोगों ने हस्ताक्षर किए।

हालांकि, जनसभा में मतदाता सूची से जुड़े किसी विशिष्ट मामले या प्रभावित मतदाताओं की संख्या का विवरण नहीं दिया गया।

निर्माण मजदूरों का पंजीकरण और योजनाओं का लाभ देने की मांग

जनसभा में निर्माण मजदूरों के अधिकारों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।

वक्ताओं ने मांग की कि निर्माण मजदूर कल्याण योजना के तहत सभी पात्र निर्माण मजदूरों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए।

साथ ही, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए अनावश्यक शर्तों और लंबी प्रक्रियाओं से राहत मिलनी चाहिए।

अभियान में शामिल लोगों ने कहा कि मजदूरों के लिए संचालित योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद श्रमिकों तक सहायता पहुंचाना है।

ऐसे में पंजीकरण और लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल होनी चाहिए, ताकि पात्र श्रमिक योजनाओं के लाभ से वंचित न रहें।

एलिवेटेड रोड परियोजना रद्द करने की मांग, बसों की संख्या बढ़ाने का सुझाव

देहरादून में प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर भी जनसभा में विरोध दर्ज कराया गया।

स्थानीय लोगों ने परियोजना रद्द करने की मांग करते हुए इसके विकल्प के रूप में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने का सुझाव दिया।

उन्होंने शहर में बसों की संख्या बढ़ाने की मांग की, ताकि लोगों को आवागमन के लिए बेहतर सुविधा मिल सके।

सभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पर्यावरणविद् नीलेश राठी ने कहा कि एलिवेटेड रोड जैसी परियोजनाओं पर

हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बजाय अस्पतालों और स्कूलों पर अधिक धन खर्च किया जाना चाहिए।

उनका कहना था कि सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

एलिवेटेड रोड परियोजना के विरोध और बसों की संख्या बढ़ाने की मांग को भी अभियान के बैनरों में शामिल किया गया।

मलिन बस्ती अधिनियम लागू करने की मांग

जनसभा में मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया गया।

लोगों ने वर्ष 2016 में बने मलिन बस्ती अधिनियम को लागू करने की मांग की।

उनका कहना था कि बस्ती के निवासियों से जुड़े मुद्दों पर कानून के अनुरूप कार्रवाई होनी चाहिए।

इस मुद्दे को भी जनसंपर्क अभियान के दौरान उठाई गई प्रमुख मांगों में शामिल किया गया।

अभियान का उद्देश्य स्थानीय लोगों की समस्याओं और मांगों को सामने लाना बताया गया।

जनसंपर्क अभियान में स्थानीय लोगों की भागीदारी

हैप्पी एन्क्लेव में आयोजित इस सभा में रामदास, सरफराज, राजेंद्र शाह, शंकर गोपाल, सुनीता देवी, जरीना और जमील सहित अन्य लोग शामिल रहे।

सभा के दौरान विभिन्न मांगों के समर्थन में तैयार किए गए बैनरों पर हस्ताक्षर किए गए।

जनसभा में मतदाता सूची, निर्माण मजदूरों के अधिकार, मलिन बस्ती अधिनियम और प्रस्तावित एलिवेटेड रोड जैसे मुद्दों को एक साथ उठाया गया।

आयोजकों और स्थानीय लोगों की ओर से इन मांगों को जनसंपर्क अभियान के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है।

अब इन मांगों पर संबंधित प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

https://regionalreporter.in/uttarakhand-vidhansabha-session-gairsain-27-october-2026/
https://youtu.be/2GhRDtqQKaw?si=G1wrotFneOMYm1kA
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