यूरोप के कई देशों में युवाओं और छात्रों के प्रदर्शन तेज हो गए हैं। कहीं शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठ रही
है, तो कहीं महंगे किराये, कम वेतन, बेरोजगारी और बढ़ती महंगाई के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर रहे हैं।
फ्रांस में शुरू हुआ छात्र आंदोलन व्यापक जनप्रदर्शनों में बदल गया है, जबकि इटली, बेल्जियम, पुर्तगाल और
अल्बानिया में भी अलग-अलग मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुई हैं।
फ्रांस: शिक्षकों की कमी और बदहाल स्कूलों से शुरू हुआ आंदोलन
फ्रांस में सितंबर के मध्य में शुरू हुए छात्र प्रदर्शनों की प्रमुख वजह स्कूलों में शिक्षकों की कमी, कक्षाओं में जरूरत
से ज्यादा विद्यार्थियों की संख्या और जर्जर बुनियादी ढांचा बताया गया। छात्रों ने पढ़ाई के लंबे घंटों, शिक्षकों की
अनुपस्थिति और विश्वविद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं पर भी सवाल उठाए।
17 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन ने व्यापक रूप ले लिया। फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, उस दिन देशभर में 5.5
लाख से अधिक लोग प्रदर्शनों में शामिल हुए। कुछ स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए, दुकानों और सार्वजनिक
इमारतों को नुकसान पहुंचा तथा पुलिस के साथ झड़पें हुईं। फ्रांसीसी प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू के अनुसार
इस दौरान 1,200 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 150 पुलिसकर्मी घायल हुए।

इटली: महंगाई और आर्थिक दबाव के खिलाफ प्रदर्शन
इटली के मिलान और बोलोन्या जैसे शहरों में महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत के खिलाफ प्रदर्शन हुए।
प्रदर्शनकारियों की चिंताओं में रोजमर्रा की जरूरतों पर बढ़ता खर्च और आर्थिक दबाव प्रमुख रहे।
मिलान में शांतिपूर्ण मार्च के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित
करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। बोलोन्या में भी कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों
और पुलिस के बीच टकराव की खबरें सामने आईं।
पुर्तगाल: महंगे मकान और कम वेतन से परेशान युवा
पुर्तगाल में युवाओं और अन्य प्रदर्शनकारियों ने महंगे किराये, घर खरीदने में बढ़ती मुश्किलों और कम वेतन का
मुद्दा उठाया। राजधानी लिस्बन में हजारों लोग बेहतर जीवन परिस्थितियों, अधिक वेतन और किफायती आवास की
मांग को लेकर सड़कों पर उतरे।
रिपोर्ट के अनुसार, पुर्तगाल में वर्ष 2017 के बाद से मकानों की कीमतें दोगुने से अधिक हो चुकी हैं, जबकि नए
किरायानामों पर किराये में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई है। इससे खासकर युवा वर्ग के लिए स्वतंत्र रूप से रहने और अपना घर खरीदने की चुनौती बढ़ गई है।

अल्बानिया: भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सरकार के खिलाफ आक्रोश
अल्बानिया में छात्र आंदोलन शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों, रोजगार की कमी और कथित सरकारी भ्रष्टाचार के
विरोध से व्यापक सरकार-विरोधी प्रदर्शन में बदल गया है। प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
रॉयटर्स की 18 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, आंदोलन लगातार छठे दिन भी जारी था। राजधानी तिराना में
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। पुलिस ने आंसू गैस, पानी की बौछारों और रबर की गोलियों का
इस्तेमाल किया। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनों के दौरान 388 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामलों में कार्रवाई की
गई। विवादित तटीय विकास परियोजना के विरोध ने भी देश में पहले से चल रहे असंतोष को बढ़ाया है।
बेल्जियम: शिक्षा सुधार और बढ़ती फीस पर विरोध
बेल्जियम में छात्र शिक्षा सुधारों, बजट कटौती और उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
छात्रों को आशंका है कि खर्च में कटौती और नए नियमों से शिक्षा की गुणवत्ता तथा विश्वविद्यालयों तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।
ब्रसेल्स और लीज जैसे शहरों में प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने कुछ जगह आंसू गैस और पानी की बौछारों का
इस्तेमाल किया। लीज में शिक्षा खर्च और सुधारों के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान 100 से अधिक लोगों को
हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी।

क्या पूरे यूरोप में एक ही आंदोलन चल रहा है?
यूरोप में सामने आ रहे इन प्रदर्शनों की वजहें पूरी तरह एक जैसी नहीं हैं और इन्हें किसी एक साझा संगठन का
आंदोलन नहीं कहा जा सकता। हालांकि, शिक्षा पर खर्च, महंगाई, आवास की कमी, कम वेतन और युवाओं के
भविष्य को लेकर अनिश्चितता जैसे मुद्दे कई देशों में समान रूप से उभर रहे हैं।
यूरोपीय मामलों के जानकारों के मुताबिक, इन विरोध प्रदर्शनों के जरिए युवा और आम नागरिक अपनी आर्थिक
तथा सामाजिक चिंताएं सामने रख रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकारों की नीतियां, पुलिस की कार्रवाई और
प्रदर्शनकारियों की मांगों पर होने वाली बातचीत यह तय करने में अहम होगी कि इन आंदोलनों का आगे क्या रूप सामने आता है।
युवा शिक्षा व्यवस्था, बढ़ती महंगाई, महंगे आवास और बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। फ्रांस और अल्बानिया में आंदोलन के दौरान पुलिस से झड़पें भी हुईं।















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