जगमोहन रौतेला
बागेश्वर जिले की कमस्यार घाटी के नरगोली गांव निवासी और भारतीय सेना के पूर्व हवलदार लाल सिंह रौतेला का 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
मंगलवार देर शाम हृदय गति रुकने से उन्होंने अंतिम सांस ली। बुधवार को बागेश्वर के सरयू घाट पर पूरे सैन्य सम्मान और पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
उनके बड़े पुत्र बिशन सिंह रौतेला और मंझले पुत्र दीपक सिंह रौतेला ने मुखाग्नि दी।
तीन युद्धों में दिखाया पराक्रम
लाल सिंह रौतेला भारतीय सेना के सिग्नल कोर में 1956-57 में भर्ती हुए थे। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध तथा 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में सक्रिय भागीदारी निभाई।
तीनों युद्धों में उन्होंने अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया। वर्ष 1977 में वे हवलदार पद से सेवानिवृत्त हुए।
शिक्षा और सैन्य जीवन की प्रेरक यात्रा
25 दिसंबर 1933 को नरगोली गांव में जन्मे लाल सिंह रौतेला ने 1953 में काण्डा हायर सेकेंडरी स्कूल से हाईस्कूल और 1955 में इंटरमीडिएट उत्तीर्ण किया।
साधारण परिवार से निकलकर सेना में भर्ती होने और तीन-तीन युद्धों में देश की सेवा करने की उनकी यात्रा क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत रही।
परिवार में शोक
वे अपने पीछे 85 वर्षीय पत्नी कौशल्या रौतेला, तीन पुत्र-बिशन सिंह, दीपक सिंह और गणेश रौतेला तथा दो विवाहित बेटियां सरोज और पुष्पा का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
उनके दो पुत्र शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं, जबकि सबसे छोटे पुत्र गणेश रौतेला आईटीबीपी में डिप्टी कमांडेंट के पद पर तैनात हैं और वर्तमान में भारतीय शांति मिशन के तहत विदेश में सेवाएं दे रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों ने दी श्रद्धांजलि
पूर्व सैनिक लाल सिंह रौतेला के निधन पर क्षेत्र में शोक की लहर है। कपकोट विधायक सुरेश सिंह गड़िया, पूर्व विधायक ललित सिंह फर्स्वाण, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी,
जिला पंचायत सदस्य सरोज आर्या सहित अनेक जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नागरिकों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
देश की रक्षा में तीन युद्धों के योद्धा रहे लाल सिंह रौतेला का जीवन साहस, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की मिसाल बनकर सदैव याद किया जाएगा।
















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