उत्तराखंड की पारंपरिक खाद्य विरासत और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से 7 अक्टूबर को गढ़ भोज दिवस मनाया जाएगा।
इस वर्ष इसका राज्य स्तरीय मुख्य आयोजन श्रीनगर गढ़वाल के रामलीला मैदान में होगा।
कार्यक्रम सुबह 11 बजे आयोजित किया जाएगा। इसमें उत्तराखंड सरकार के विद्यालयी शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
‘स्वस्थ उत्तराखंड की ओर एक सशक्त कदम’ है इस वर्ष की थीम
इस वर्ष गढ़ भोज दिवस की थीम ‘गढ़ भोज-स्वस्थ उत्तराखंड की ओर एक सशक्त कदम’ रखी गई है।
आयोजन में उत्तराखंड के पारंपरिक अनाजों, स्थानीय व्यंजनों और खाद्य परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया जाएगा।
इसके साथ स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने, किसानों की आय के अवसर बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने को लेकर भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे।
मुख्य कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी।
गढ़ भोज अभियान वर्ष 2000 से संचालित किया जा रहा है।
आयोजकों के अनुसार, वर्ष 2022 से हर साल 7 अक्टूबर को गढ़ भोज दिवस मनाया जा रहा है।
इस वर्ष राज्य के विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में भी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
अमेरिका से न्यूजीलैंड तक जुड़ेंगे प्रवासी उत्तराखंडी
आयोजक डॉ. अरविंद दरमोड़ा ने बताया कि गढ़ भोज दिवस अब उत्तराखंड तक सीमित नहीं है।
अमेरिका, नीदरलैंड और न्यूजीलैंड समेत विभिन्न देशों में रह रहे प्रवासी उत्तराखंडी भी इस आयोजन से जुड़ेंगे।
इसका उद्देश्य प्रवासी उत्तराखंडियों को अपनी पारंपरिक खाद्य विरासत से जोड़ना और स्थानीय अनाज एवं व्यंजनों की पहचान को व्यापक स्तर पर पहुंचाना है।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उनकी सार्वजनिक यात्रा से जुड़े विषयों की जानकारी भी साझा की जाएगी।
आयोजक द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने कहा कि गढ़ भोज केवल भोजन तक सीमित नहीं है,
बल्कि यह उत्तराखंड की खेती, संस्कृति, जैव विविधता, स्वास्थ्य और स्थानीय आजीविका से जुड़ी विरासत है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को सम्मान और बाजार उपलब्ध कराना सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम का आयोजन हिमालयन पर्यावरण जड़ी-बूटी एग्रो संस्थान ‘जाड़ी’, उत्तरकाशी और पर्वतीय विकास शोध केंद्र, श्रीनगर के सहयोग से किया जा रहा है।
इसमें एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र एवं समाज कार्य विभाग तथा मानव विज्ञान विभाग भी सहभागी हैं।















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