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ग्रेट निकोबार में बनेगा 13 हजार करोड़ का नया एयरपोर्ट

INS बाज रनवे विस्तार योजना हुई रद्द

केंद्र सरकार ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के तहत INS बाज के रनवे को 10 हजार फीट तक बढ़ाने की योजना को रद्द कर दिया है।

इसके बजाय अब ग्रेट निकोबार द्वीप पर 13 हजार करोड़ रुपये की लागत से एक नया सिविल-मिलिट्री एयरपोर्ट बनाया जाएगा।

यह एयरपोर्ट भारतीय नौसेना के नियंत्रण में रहेगा, लेकिन इसका उपयोग आम नागरिकों की उड़ानों के लिए भी किया जाएगा।

गलाथिया खाड़ी के पास बनेगा नया एयरपोर्ट

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नया एयरपोर्ट ग्रेट निकोबार द्वीप के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में

गलाथिया खाड़ी के पास चिंगेन क्षेत्र में विकसित किया जाएगा।

यह स्थान रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) के करीब स्थित है।

मलक्का जलडमरूमध्य हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर को जोड़ने वाला

दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।

यहां से हर साल बड़ी मात्रा में अंतरराष्ट्रीय मालवाहक जहाजों की आवाजाही होती है।

क्या है INS बाज

INS Baaz भारतीय सशस्त्र बलों का सबसे दक्षिणी नौसैनिक हवाई स्टेशन है।

यह ग्रेट निकोबार द्वीप के कैंपबेल बे में स्थित है और 31 जुलाई 2012 को इसे औपचारिक रूप से कमीशन किया गया था।

शुरुआत में इसका रनवे करीब 3,500 फीट लंबा था, जहां केवल डोर्नियर-228 जैसे छोटे निगरानी विमान और हल्के हेलिकॉप्टर ही उतर सकते थे।

वर्ष 2021 में रनवे को बढ़ाकर 4,500 फीट किया गया था।

क्यों छोड़ा गया रनवे विस्तार का प्लान

सरकार INS बाज के रनवे को 10 हजार फीट तक बढ़ाने पर विचार कर रही थी,

ताकि बड़े सैन्य और परिवहन विमान यहां उतर सकें।

हालांकि अधिकारियों के अनुसार इसके लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता पड़ती।

इससे आदिवासी क्षेत्रों, घने जंगलों और वन्यजीवों पर असर पड़ने की आशंका थी।

इसी वजह से सरकार ने रनवे विस्तार की योजना को छोड़कर नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण का फैसला लिया है।

अगले पांच साल में तैयार होगा एयरपोर्ट

अधिकारियों के मुताबिक नया एयरपोर्ट अगले पांच वर्षों में तैयार किया जा सकता है।

यह एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट होगा, जहां भविष्य में विस्तार की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।

नया एयरपोर्ट भारतीय नौसेना के नियंत्रण में रहेगा, लेकिन नागरिक उड्डयन सेवाओं के लिए भी इसका उपयोग किया जाएगा।

इससे क्षेत्र में सैन्य और नागरिक दोनों तरह की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

भारत को क्या होगा फायदा

नया एयरपोर्ट बनने से अंडमान-निकोबार क्षेत्र में भारत की सामरिक स्थिति और मजबूत होगी। इसके प्रमुख लाभों में शामिल हैं:

  • हिंद महासागर क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति मजबूत होगी।
  • मलक्का जलडमरूमध्य पर निगरानी क्षमता बढ़ेगी।
  • सैनिकों और सैन्य उपकरणों की तेज तैनाती संभव होगी।
  • समुद्री सुरक्षा और हवाई निगरानी को मजबूती मिलेगी।
  • क्षेत्र में नागरिक हवाई संपर्क बेहतर होगा।

क्या है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट

Great Nicobar Project केंद्र सरकार की करीब 81 हजार करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना है।

इस परियोजना के तहत कई बड़े बुनियादी ढांचा विकास कार्य प्रस्तावित हैं।

परियोजना के प्रमुख हिस्से

  • अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट
  • ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट
  • पावर प्लांट
  • नया टाउनशिप

सरकार का मानना है कि यह परियोजना भारत की समुद्री और आर्थिक शक्ति को नई मजबूती देगी।

विपक्ष ने उठाए पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों के सवाल

इस परियोजना को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।

कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने इस प्रोजेक्ट को पर्यावरण और आदिवासी समुदायों के हितों के खिलाफ बताया है।

उनका आरोप है कि इससे ग्रेट निकोबार की प्राकृतिक जैव विविधता और आदिवासी विरासत को नुकसान पहुंच सकता है।

हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।

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