राहुल पर FIR के बाद कांग्रेस का सीएम आवास घेराव का ऐलान
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कथित शुद्धिकरण को लेकर उत्तराखंड की सियासत लगातार गरमा रही है।
मामला अब राहुल गांधी पर दर्ज FIR से आगे बढ़कर सीधे सरकार और कांग्रेस के आमने-सामने आने तक पहुंच गया है।
कांग्रेस ने मंगलवार को राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मुकदमे और कथित शुद्धिकरण के विरोध में सचिवालय कूच किया।
पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोक दिया।
प्रदर्शन के दौरान प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया।
अब कांग्रेस ने 7 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास घेराव का ऐलान किया है।
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा है कि सरकार यदि इससे पहले कांग्रेस की तीन मांगें मान लेती है, तो पार्टी अपने अगले आंदोलन पर पुनर्विचार कर सकती है।
आखिर पूरा विवाद शुरू कहां से हुआ
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में 8 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा हुई थी।
इसके तीन दिन बाद 11 अगस्त को वहां धार्मिक अनुष्ठान किया गया।
कांग्रेस ने इस अनुष्ठान को खड़गे की सभा के बाद किया गया कथित ‘शुद्धिकरण’ बताते हुए सवाल उठाए।
पार्टी ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई दलित समाज और खड़गे के अपमान से जुड़ी है।
आयोजन से जुड़े लोगों की ओर से इसे धार्मिक आस्था और मैदान की सफाई से जुड़ा कार्यक्रम बताया गया।
इस वजह से घटना को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद बढ़ता गया।
खड़गे से राहुल गांधी तक पहुंचा मामला
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 13 अगस्त को राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाया।
इसके बाद मामला राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया।
29 अगस्त को राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस घटना पर सवाल उठाए।
उन्होंने इसे छुआछूत और दलितों के अपमान से जोड़ा।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में एससी-एसटी कानून के तहत कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठाई।
राहुल गांधी पर दर्ज हुई FIR
राहुल गांधी के बयान के बाद हल्द्वानी में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई।
इसके आधार पर 30 अगस्त के आसपास मुकदमा दर्ज होने की जानकारी सामने आई।
मामले में शिकायतकर्ता अमित कुमार बताए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक अमित कुमार श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े हैं। यही संगठन कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम से जुड़ा बताया गया है।
राहुल गांधी पर आरोप लगाया गया कि उनके बयान से अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाएं आहत हुईं और सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।
यही FIR अब पूरे विवाद का नया राजनीतिक केंद्र बन गई है।
कांग्रेस ने भी थानों में दी तहरीर
राहुल गांधी पर मुकदमा दर्ज होने के बाद कांग्रेस ने पलटवार किया। 31 अगस्त को पार्टी ने प्रदेशभर में पुलिस थानों और चौकियों में तहरीर दी।
कांग्रेस ने कथित शुद्धिकरण कराने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
पार्टी ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की भूमिका और उनके बयानों को लेकर भी कार्रवाई की मांग उठाई।
कांग्रेस का कहना है कि जब कथित शुद्धिकरण की शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई, तो राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना पक्षपातपूर्ण कार्रवाई है।
CM धामी ने भी दिया जवाब
विवाद के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस हल्द्वानी रामलीला मैदान में लगे कथित ‘जिहादी नारों’ पर चुप है।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर सनातन को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया।
इस बयान के बाद कांग्रेस और सरकार के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया।
1 सितंबर को कांग्रेस का सचिवालय कूच
FIR के विरोध में कांग्रेस ने 1 सितंबर को देहरादून में सचिवालय कूच किया।
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस भवन से मार्च निकाला गया।
सुभाष रोड पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया।
कांग्रेस नेताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। गोदियाल और अन्य नेताओं ने बैरिकेडिंग पर चढ़कर विरोध जताया।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका और कई नेताओं को हिरासत में लिया। इस दौरान पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत की तबीयत बिगड़ने की खबर भी सामने आई।
अब 7 सितंबर को सीएम आवास घेरेगी कांग्रेस
सचिवालय कूच के बाद कांग्रेस ने आंदोलन को और आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने 7 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास घेराव का ऐलान किया है।
गोदियाल ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।
कांग्रेस की तीन बड़ी मांगें
पहली मांग: हल्द्वानी में कथित शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाए।
दूसरी मांग: कथित शुद्धिकरण को उचित ठहराने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के खिलाफ भी FIR दर्ज की जाए।
तीसरी मांग: राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द किया जाए।
गोदियाल का कहना है कि यदि सरकार 7 सितंबर से पहले इन मांगों पर कार्रवाई करती है, तो कांग्रेस मुख्यमंत्री आवास घेराव के अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सकती है।
कांग्रेस बोली- वैचारिक लड़ाई सड़क तक जाएगी
गणेश गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखेगी।
उन्होंने कहा कि पार्टी वैचारिक लड़ाई के लिए तैयार है। जरूरत पड़ी तो इस लड़ाई को सड़क पर उतरकर भी लड़ा जाएगा।
इस बयान से साफ है कि कांग्रेस ने फिलहाल इस मुद्दे को छोड़ने का फैसला नहीं किया है।
अब विवाद के दो मोर्चे
हल्द्वानी का यह विवाद अब दो अलग-अलग कानूनी और राजनीतिक सवालों में बंट गया है।
एक तरफ कांग्रेस कथित शुद्धिकरण को लेकर कार्रवाई की मांग कर रही है। दूसरी तरफ राहुल गांधी के बयान पर दर्ज FIR की जांच आगे बढ़ रही है।
भाजपा कांग्रेस पर घटना को जातिगत रंग देने का आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस इसे दलित सम्मान और संवैधानिक मूल्यों का मुद्दा बता रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 7 सितंबर से पहले सरकार कांग्रेस की मांगों पर कोई कार्रवाई करती है या मुख्यमंत्री आवास घेराव के साथ यह राजनीतिक टकराव और बढ़ेगा।















Leave a Reply